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समाज का पोस्टमार्टम

गिर रहा है मनुष्य का अस्तित्व
यह शब्द हर समय वातावरण में गूंज रहा है।
फिर भी थम नहीं रही है,
बलात्कार और अपहरण की घटनाएं
कभी बस, कभी ट्रेन तो कभी चौक चौराहे से उठ रही हैं
सिसकियां
हर समय हो रहा है समाज का पोस्टमार्टम
एक
आज के अखबार में छपा था
चौराहे पर दिन दहाड़े हुआ
एक कमसिन युवती के साथ बलात्कार
अखबार को मिले चटपटे मसाले से
उड़ रही थीं समाज की धज्जियां
पत्रकार और अभियुक्त दोनों ताव दे-देकर ऐंठ रहे थे मूंछे
क्योंकि
एक पहले पन्ने पर छपा था बाईलाइन
तो दूसरे ने किया था समाज का पोस्टमार्टम
दो
वहशियाने हरकत की शिकार युवती की लाश पड़ी थी चौराहे पर
जहां होना चाहिए था लाज का आंचल
वहां पर चिथड़ों में दिखाई पड़ रहे थे
नाखूनों के खरोंच
और इज्जत के सामने राह चलने वाले सिर झुकाने को थे मजबूर
लेकिन दो गज कपड़े के लिए सभी थे कू्रर
सभ्य समाज इतने पर भी चुप था
कोई उसे बदचलन कहता तो कोई बेचारी
लेकिन इस हरकत के खिलाफ आवाज उठाने की नहीं समझी किसी ने भी जिम्मेदारी
तीन
छह घंटे बाद,
सिमसिम की आवाज के साथ पुलिस ने खोली अपनी फाइल
और फिर उसी तरह बंद कर दी
जिस तरहपोस्टमार्टम हाउस के मेहतर ने
पोस्टमार्टम हो चुकी युवती के शरीर को फाड़कर
फिर किया पोस्टमार्टम,और पुन: शरीर को सिल दिया।
अतुल चंद्र अवस्थी *अतुल

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Comment by Atul Chandra Awsathi *अतुल* on January 28, 2013 at 1:57pm

आदरणीय पाठक जी रचना पसंद आई सादर आभार.

Comment by ram shiromani pathak on January 28, 2013 at 1:49pm

वाह वाह क्या रचना है ,शब्द नहीं है 

Comment by Atul Chandra Awsathi *अतुल* on January 27, 2013 at 12:23pm

आदरणीय सीमा अग्रवाल जी हौसला बढ़ाने के लिए बहुत-बहुत आभारी हूं।

Comment by seema agrawal on January 27, 2013 at 12:17pm

 दोहरे मूल्यों से ग्रस्त समाज को आईना दिखाती रचना ..हार्दिक बधाई 

Comment by Atul Chandra Awsathi *अतुल* on January 27, 2013 at 12:06pm

आदरणीय बागी जी- समाज का एक कड़वा सच शब्दों के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया है। हौसला बढ़ाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 26, 2013 at 3:04pm

समाज का एक नंगा सच, जिसे मानना हमारी विवशता है , दोषी हम सब हैं , आँखों के सामने होता है और हम तमाशबीन होते है, बहुत ही संवेदनशील रचना की प्रस्तुति है , बहुत बहुत बधाई आदरणीय अतुल चन्द्र अवस्थी जी ।

Comment by Atul Chandra Awsathi *अतुल* on January 25, 2013 at 8:59pm

आदरणीय राम शिरोमणि जी और श्री श्याम नरायन जी हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

Comment by ram shiromani pathak on January 25, 2013 at 7:47pm


इस संवेदनशील रचना के लिए बधाई।

Comment by Shyam Narain Verma on January 25, 2013 at 4:38pm

Bahot khoob

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