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लक्ष्मी मेरे घर की .....-- मीना पाठक

आरती की थाली 
लिए हाथों में 
जाने कब से 
निहार रही हूँ बाट ....
आएगी वह 
जब सिमटी लाल-जोड़े में ,
मेहँदी रचे हाथों से 
दरवाज़े पर लगा कर 
हाथों के थाप ,
ढरकाती हुई अन्न का कलश
आलता लगे पैरों से
निशान बनाती करेगी 
प्रवेश मेरी बहू अन्नपूर्णा, 
मेरे घर में 
बन मेरे घर की लक्ष्मी ||

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Comment

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Comment by Meena Pathak on February 22, 2013 at 12:37pm

उपासना जी बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by Meena Pathak on February 22, 2013 at 12:36pm

आदरणीय अशोक कुमार जी हार्दिक आभार स्वीकार करें 

Comment by Meena Pathak on February 22, 2013 at 12:35pm

सच  नीलिमा जी .. बहुत प्यारी खुशी ... शुक्रिया आप का 

Comment by upasna siag on February 21, 2013 at 10:27pm

bahut achhi bhavna aapki meena ji .....aane wali khushi ke liye bahut sari shubhkaamnaye

Comment by Ashok Kumar Raktale on February 19, 2013 at 11:18pm

शुभकामना शुभकामना शुभकामना रचना की हर पंक्ति के भावों पर मेरी शुभकामना. सुन्दर रचना.

 

Comment by Neelima Sharma Nivia on February 19, 2013 at 8:36pm

Bahut pyari si khushi  :)

Comment by Meena Pathak on February 19, 2013 at 1:04pm

बहुत बहुत आभार रेखा जोशी जी ..

Comment by Meena Pathak on February 19, 2013 at 1:02pm

हार्दिक आभार आदरणीय आशीष नैथानी जी ..

Comment by Meena Pathak on February 19, 2013 at 1:00pm

हर सासू माँ का यही सपना होता है संदीप जी .... सादर आभार 

Comment by Meena Pathak on February 19, 2013 at 12:59pm

आदरणीय विजय निकोर जी बहुत बहुत आभार ... आप ने मुझे ही लक्ष्मी नाम  दे दिया   :)

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