For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हम एक दुसरे के प्रति अपना प्यार जताने को कोई न कोई तौहफा देते हैं ! कुछ ऐसा जो लेने वाले को अच्छा और दुनिया में सबसे न्यारा और कीमती लगे ! भौतिक रूप में दिया गया तौहफा ख़राब हो सकता है टूट सकता है लेकिन अगर तौहफा दिल से दिया जाये, मन से दिया जाये , भावनाओं से दिया जाये तो वो हमेशा दिलो दिमाग में रहता है ! उसकी कीमत अनमोल होती है ! अतः अपने में सबसे प्यारे व्यक्ति को तौहफा भी सबसे प्यारा देना चाहिए ! मैं ये मेरी भावनाएं शब्दों में पिरोकर अपने जीवन साथी को तौह्फे में दे रही हूँ ..........

शादी की सालगिरह बहुत बहुत मुबारक हो पतिदेव जी, जिंदगी भर आपका साथ यूँ ही बना रहे तो हम अपने आपको दुनिया के सबसे खुशनसीब समझेंगे, क्यूंकि कहा गया है, "रहमत की लकीरें तो हर हाथ में लिखी होती हैं लेकिन, मोह्बत की लकीरें सिर्फ और सिर्फ नसीब वालों के हाथों में सजती हैं "

तुझ संग कांटे भी लगते हैं फूल ,

तुझ बिन जिए तो कैसे हम नामाकूल !

जिंदगी बस तुझ संग ही हसीन लगती है ,

बिना तेरे हर ख़ुशी है अधूरी- सी लगती है !

सात फेरे लिए थे और दिए थे सात वचन ,

तब से ही जुड़ गए थे हम दोनों के जीवन !

रिश्ता ये हमारा दुनिया में बड़ा ही न्यारा ,

हर रिश्ते से ऊपर और हर रिश्ते से प्यारा !

तुझ संग हूँ तो दुनिया लगती है प्यारी ,

तेरी बाँहों में है खुशियों की जन्नत न्यारी !

साथ हमारा रहेगा हमेशा कर ले ये वादा साजन ,

तुझपे कुर्बान कर दूँ ख़ुशी से मेरी ये जान साजन !

  • प्रवीन मलिक

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

Views: 651

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on February 25, 2013 at 11:49am
बहुत ही उच्च भावना है प्रवीन जी!विवाह की शुभकामना के साथ हम आपके पति के दीर्घायु की कामना करते हैं।कथ्य और सुन्दर भाव के साथ यदि सुन्दर शिल्प भी होता तो पतिदेव को कितना सुन्दर तोहफा मिलता।
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 25, 2013 at 10:45am

शुभकामनाए भी और सुन्दर प्यास के लिए बधाई भी स्वीकारे 

Comment by बृजेश नीरज on February 24, 2013 at 10:56pm

प्रवीन मलिक जी विवाह की वर्षगांठ की शुभकामनाएं। आपका साथ बरकरार रहे और हर वर्षगांठ पर हमें भी आपकी ऐसी रचनाओं की सौगात मिले। 

Comment by Meena Pathak on February 24, 2013 at 8:50pm

पहले तो बहुत बहुत शुभकामनाएं आप को विवाह के वर्षगाँठ की .. बहुत सुन्दर तोहफा दिया आप ने अपने जीवन साथी को .. बहुत बहुत बधाई स्वीकारें 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"स्वागतम"
5 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
14 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Feb 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 6
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Feb 5
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Feb 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service