For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आत्म साक्षात्कार

       इस सृष्टि के प्रारम्भ से ही मानव ह्रदय में अपने अस्तित्व को लेकर अनेक प्रश्न उठते रहे हैं। 'मैं कौन हूँ' 'इस धरती पर मेरे आगमन का क्या औचित्य है' ' वह कौन है जो इस सम्पूर्ण सृष्टि को नियंत्रित करता है' इन सभी प्रश्नों ने वर्षों से मानव ह्रदय को आंदोलित कर रखा है। मनुष्य की सम्पूर्ण वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक प्रगति का कारण यही प्रश्न रहे हैं।

            जब भी इन प्रश्नों ने किसी व्यक्ति के मन को माथा है तब वह इन प्रश्नों का उत्तर प्राप्त करने के लिए व्याकुल हो उठा है। उसकी इस व्याकुलता ने उसे आध्यात्म के दुष्कर मार्ग का पथिक बना दिया है। अपने प्रश्नों का उत्तर खोजने के लिए वह सिद्धार्थ की भांति अपना सर्वस्व त्याग कर इस दुर्गम मार्ग पर चल पड़ा है। यह सिद्धार्थ जब अपने प्रश्नों के वन में भटकते भटकते थक जाता है तब शांत होकर एक स्थान पर बैठ जाता है। अपने आप को बाहरी दुनिया से पृथक कर वह अंतर्मुखी हो जाता है। गहन साधना के बाद वह उन प्रश्नों का उत्तर अपने भीतर पाता है जिन्हें पाने के लिए वह बाहर भटक रहा था। हर सिद्धार्थ को गौतम बनाने के लिए इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

भगवद गीता में आत्म साक्षात्कार के दो मार्ग बताये गए हैं -

  • ज्ञान मार्ग 
  • कर्म मार्ग

ज्ञान का मार्ग बहुत कठिन है। यह मार्ग उनके लिए उचित है जो जो पूर्ण ज्ञानी हैं। एक नौसीखिए के लिए

यह डगर फिसलन से भरी है। अतः आत्म अनुभूति की चाह रखने वाले के लिए निष्काम कर्म का मार्ग ही श्रेष्ठ है।

व्यक्ति चाहे किसी भी मार्ग का चुनाव करे किन्तु एक दृढ प्रतिज्ञ व्यक्ति ही आध्यात्म की राह पर आगे बढ़ सकता है। आत्म विश्वास से भरा हुआ व्यक्ति ही इस यात्रा की कठिनाईयों का सामना कर सकता है। पलायनवादी व्यक्ति जो आत्म अनुभूति की आड़ में अपने कर्तव्यों से भागता है कभी भी सफलता नहीं पाता है। आत्म साक्षात्कार का मार्ग दुर्बल ह्रदय वाले व्यक्तियों के लिए नहीं है।

          प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य आत्म अनुभूति है। जैसे नदियाँ सागर की ओर बढ़ती हैं हम भी आत्म अनुभूति के पथ पर तब तक बढ़ते रहते हैं जब तक अपनी मंजिल न पा लें। इस प्रक्रिया में कई जन्म लग जाते हैं।

Views: 760

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 21, 2016 at 8:41pm
ज्ञान मार्ग और कर्म मार्ग से आत्म अनुभूति का पाठ पढ़ाता बढ़िया आलेख। सादर हार्दिक बधाई और आभार आदरणीय आशीष कुमार त्रिवेदी जी।
Comment by ram shiromani pathak on March 15, 2013 at 11:00am

आध्यात्मिक चिंतन से जुड़े इस लेख के लिए हार्दिक बधाई भाई श्री आशीष कुमार त्रिवेदी जी  !!!!!!!!!

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 12, 2013 at 4:19pm

आत्म साक्षात्कार का मार्ग दुर्बल ह्रदय वाले व्यक्तियों के लिए नहीं है। - सही कहा है आपने, स्वामी विवेकनन्द

के गुरुश्रद्ध्येय राम कृष्ण परम हंस ने भी यही कहा था | अगर प्रबल श्रद्धा और आत्म हो तो बालक ध्रुव की तरह

ज्ञान अर्जितकिया जा सकता है,जो शैक्षणिक विधा से भी संभव नहीं | तब भौतिक संसार कर्म का मार्ग श्रेयस्कर और आवश्यक है |

आध्यात्मिक चिंतन से जुड़े इस लेख के लिए हार्दिक बधाई भाई श्री आशीष कुमार त्रिवेदी जी  


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 11, 2013 at 11:14pm

निवेदन है कि इस तरह के पोस्ट के लिए आध्यात्मिक चिंतन समूह है. इसे अविलम्ब आध्यात्मिक चिंतन समूह में डाल दिया जाय.

सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
17 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
20 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Feb 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Feb 4

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service