For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सत्य सनातन व्याकुल होकर देख रहा अपने उपवन को

सुप्रभात मित्रों , आप सभी के अवलोकन हेतु सत्य सनातन पर लिखी अपनी कुछ पंक्तियाँ | सादर


सत्य सनातन व्याकुल होकर देख रहा अपने उपवन को
खर -पतवार सरीखे मजहब खा जायेंगे सुन्दर वन को ||

मैंने ही सारी वशुधा को एक कुटुंब पुकारा था
मेरी ही साँसों से निकला शांति पाठ का नारा था ||
दया धर्म मानवता जैसी सरल रीत मैंने सिखलाई
परहित धर्म आचरण शिक्षा मैंने ही सबको बतलाई ||

क्या हालत कर दी हे मानव भूल गया क्यूँ अंतर्मन को
खर -पतवार सरीखे मजहब खा जायेंगे सुन्दर वन को ||

धरती , अम्बर , चन्द्र ,दिवाकर का सम्मान सिखाया मैंने
पेड़ , पुष्प जल -थल जंगल का कर सम्मान बताया मैंने ||
होम , हवन से घर- घर तेरे प्राण वायु को शुद्ध किया था
संयम ,नियम योग आसन से तन -मन को प्रबुद्ध किया था ||

सत्य अहिंसा छोड़ चला क्यूँ भूल गया क्यूँ वेद वचन को
खर -पतवार सरीखे मजहब खा जायेंगे सुन्दर वन को ||

मैंने कर्म बाँट कर सबको सामाजिक दायित्व बताया
गुण पर आधारित जीवन हो लोकमान्य नेतृत्व दिखाया
मर्यादा की रेखाओं में जीवन की भाषा समझाई
सदाचार की परिपाठी में सत्य दरश आशा बतलाई ||

मर्यादा अब गिद्ध बन गयी और आचरण बेचे तन को
खर -पतवार सरीखे मजहब खा जायेंगे सुन्दर वन को ||

मेरा मार्ग राम को भाया , रामराज्य परचम लहराया
योगेश्वर केशव ने जग को कर मेरा विस्तार सुनाया
सरल सुगम है मेरा ईश्वर कण कण में रहता है नश्वर
नहीं मिटा पायेगा मुझको कोशिश चाहे तू जितनी कर ||

जौहरी बन फिर परख मुझे , क्यूँ फेंक रहा मूरख कुंदन को
खर -पतवार सरीखे मजहब खा जायेंगे सुन्दर वन को ||.......... मनोज नौटियाल

Views: 449

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 16, 2013 at 11:10pm

भाई मनोज नौटियाल जी, आपकी प्स्तुत कविता तथ्यात्मक विन्दुओं को बखूबी साझा करती है.  कविता की पंक्ति-पंक्ति प्रमाण है. हृदय से बधाई स्वीकार करें.

आपसे अन्य रचनाओं की अपेक्षा है.

शुभकामनाएँ.

Comment by बृजेश नीरज on March 15, 2013 at 7:42pm

बहुत सुन्दर!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 15, 2013 at 3:17pm

सत्य सनातन पर एकत्व का भाव लिए सुन्दर प्रस्तुति.. ये विविधताएं उस परमतत्व ने नहीं बनाईं, उसके लिए तो सब समान है सौहार्द्मय और सुन्दर संतुलन में है..ये भिन्नताएँ, अलगाव, सब अहंकार के आधीन हुए मनस और बुद्धि की दें है ...

सुन्दर भावों को साँझा करती इस प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई मनोज नौटियाल जी.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"चमत्कार की आत्मकथा (लघुकथा): एक प्रतिष्ठित बड़े विद्यालय से शन्नो ने इस्तीफा दे दिया था। कुछ…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"नववर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं समस्त ओबीओ परिवार को। प्रयासरत हैं लेखन और सहभागिता हेतु।"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ

सूर्य के दस्तक लगाना देखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठित जिस समय जग अर्थ ’नव’…See More
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"बहुत आभार आदरणीय ऋचा जी। "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"नमस्कार भाई लक्ष्मण जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है।  आग मन में बहुत लिए हों सभी दीप इससे  कोई जला…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"हो गयी है  सुलह सभी से मगरद्वेष मन का अभी मिटा तो नहीं।।अच्छे शेर और अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई आ.…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"रात मुझ पर नशा सा तारी था .....कहने से गेयता और शेरियत बढ़ जाएगी.शेष आपके और अजय जी के संवाद से…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. ऋचा जी "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. तिलक राज सर "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. लक्ष्मण जी "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. जयहिंद जी.हमारे यहाँ पुनर्जन्म का कांसेप्ट भी है अत: मौत मंजिल हो नहीं सकती..बूंद और…"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service