2122, 2122, 2122, 2
भूख से बिल्ली परेशां जो रही होगी
रोटियां बासी तभी तो खा गयी होगी
हौसले परिंदों के भी तो पस्त होते हैं
लाख उड़ने की कला उनमें रही होगी
कोयलों की कूक गायब हो गयी है अब
साथ ही में उन दरख्तों के खो गयी होगी
आपका पहलू जरा सा जो हवा में था
ये वही खुशबू यहां तक आ रही होगी
ये गुंचे भी सरनिगूं होने लगे हैं जो
वो सबा भी बात तेरी कर रही होगी
Comment
आदरणीय सौरभ जी, आपका आभार! मैं आपकी टिप्पणी की ही प्रतीक्षा में था क्योंकि आपकी टिप्पणी सदैव मेरी मार्गदर्शक रहती हैं।
एक बार फिर आपका आभार!
भूख से बिल्ली परेशां जो रही होगी
रोटियां बासी तभी तो खा गयी होगी... . मतला भावुक शब्दों में रंग का तो लग रहा है लेकिन बिल्ली के साथ बासी रोटी कंट्रास्ट पैदा नहीं कर पा रही है.
हौसले परिंदों के भी तो पस्त होते हैं
लाख उड़ने की कला उनमें रही होगी.. .. वाह वाह ! शेर से निस्सृत इस उस्तादाना असर के लिए ढेर् सारी दाद कुबूल करें, भाई बृजेशजी.. .
कोयलों की कूक गायब हो गयी है अब
साथ ही में उन दरख्तों के खो गयी होगी.. अंदाज़ बहुत कुछ कहता हुआ है. कोयल की कूक और खो रहे पेड़ दिल को कचोट रहे हैं.
आपका पहलू जरा सा जो हवा में था
ये वही खुशबू यहां तक आ रही होगी.. .. ओह्होह ! .. .
ये गुंचे भी सरनिगूं होने लगे हैं जो
वो सबा भी बात तेरी कर रही होगी.. ... .. वाह ! शेर की मुलामियत भा गयी.
आपका यह प्रयास दिल को भा गया भाई. सतत प्रयासरत रहें. आपकी कोशिश रंग लायी है.
बधाई .. .
आदरणीय रक्ताले जी आपका आभार!
कोयलों की कूक गायब हो गयी है अब
साथ ही में उन दरख्तों के खो गयी होगी.............बहुत खूब.
आदरणीय बृजेश नीरज जी सादर, बहुत सुन्दर भाव भरे अशार. बहुत उत्तम. दिली दाद कुबुलें.
आदरणीया मीना जी आपका हार्दिक आभार!
बहुत सुन्दर .. बधाई
आदरणीया परवीन जी आपका आभार!
बृजेश जी बहुत ही बढ़िया ...
राम शिरोमणि जी हौसला अफज़ाई के लिए आपका बहुत आभार!
बहोत खूब आदरणीय हार्दिक बधाई स्वीकारे /////////
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