For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ये काग़ज़ पे लिखी तरक्कियां, कुछ और कहती हैं
मगर लाखों करोड़ों झुग्गियां, कुछ और कहती हैं !

बड़ा फराख दिल है शहर तेरा शक नहीं मुझ को ,
ये हर-सू बंद पड़ी खिड़कियाँ, कुछ और कहती हैं !

तेरा दा'वा है कि अमन-ओ-सकूं है शहर में सारे,
मगर अख़बार की ये सुर्खियाँ, कुछ और कहती हैं !

मुझे यकीं नहीं आता बहार आ गयी, क्यों कि
उदास चेहरे लिए तितलियाँ, कुछ और कहती हैं !

मुझे गुमान था कि मैं बना हूँ खुद के ही दम से,
मेरे बापू की बूढी हड्डियाँ, कुछ और कहती हैं !

मैं फूलों तितलितों के दरमियाँ बसना तो चाहूं, पर
मेरे कुनबे की जिम्मेवारियां, कुछ और कहती हैं !

हरेक नारी नदी को माँ बुलाना संस्कृति जिनकी
वहां जिस्मों की लाखों मंडिया, कुछ और कहती हैं

Views: 737

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Admin on May 10, 2010 at 1:44pm
तेरा दा'वा है कि अमन-ओ-सकूं है शहर में सारे,
मगर अख़बार की ये सुर्खियाँ, कुछ और कहती हैं !

हरेक नारी नदी को माँ बुलाना संस्कृति जिनकी
वहां जिस्मों की लाखों मंडिया, कुछ और कहती हैं

शब्दों का अकाल पड़ा,
कुछ समझ न आता ,
मै क्या लिखू,
सब कुछ लिख गये आप,
कुछ बात न बचा,
मै क्या लिखू ,
कलम हाथ मे लेकर,
सोच रहा हु,
मै क्या लिखू,
सूरज को दीप दिखाना ,
ठीक नहीं,
मै क्या लिखू,


आदरणीय योगराज साहब , वास्तव मे आप ने इतनी उम्द्दा ग़ज़ल प्रस्तुत किया है की मै कुछ लिखने मे असमर्थ पा रहा हु, बहुत ही शानदार अभिव्यक्ति है, सभी शेयर बहुत ही खुबसूरत और अर्थपूर्णबने है, अन्तिम शेयर तो काफी अच्छा बना है, बहुत बढ़िया, हम सभी को गर्व है की ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार मे आप जैसा हिरा है, धन्यवाद ,
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on May 10, 2010 at 12:49pm
bahut badhiya yograj jee......dil ko chu lene wali rachna hai.
बड़ा फराख दिल है शहर तेरा शक नहीं मुझ को ,
ये हर-सू बंद पड़ी खिड़कियाँ, कुछ और कहती हैं !\
bahut badhiya hai...aisehi likhte rahe.....keep it up....
Comment by Biresh kumar on May 10, 2010 at 12:26pm
sidha dil ko cheer gayi prabhakar saab!!

kya baat

kya baat


or

kya baat!!!!!!!!!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
7 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
7 hours ago
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
Friday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
Friday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
Friday
Sushil Sarna posted blog posts
Friday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service