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!!! गजल !!!
वज्न- 2122, 2122, 2122, 212

अब वतन को लूटकर सिर कांटना क्या पीर है।
आम जनता रोज मरती शापता क्या पीर है।।

घूस खोरी या कमीशन खूब करते ठाठ से।
मुफलिसी का हाथ थामे रास्ता क्या पीर है।।1

जिन्दगी की डोर टूटी बम धमाका जोर से।
आदमी अब आदमी ना वासना क्या पीर है।।2

न्याय भी अब राग गाती या गरीबी-ताज हो।
जन्म का अधिकार कहती आत्मा क्या पीर है।।3

जेठ सूरज की नवाजिश वृक्ष जलकर मर रहे।
आश का पंछी पियासा चाहना क्या पीर है।।4

रात रोते चांद-तारें नींद पहरों पर अड़े।
दूब-शबनम रोज भटकें वास्ता क्या पीर है।।5

आप ‘सत्यम‘ बात लिखना आइना जो देख ले।
अब न नेता देश का है दोगला क्या पीर है।।6

के0पी0सत्यम/मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 14, 2013 at 7:07pm

आ0 रक्ताले सर जी,  बिलम्ब के लिए क्षमा।   उत्साहवर्धन हेतु आपका बहुत बहुत हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by Ashok Kumar Raktale on June 6, 2013 at 7:54am

जेठ सूरज की नवाजिश वृक्ष जलकर मर रहे।
आश का पंछी पियासा चाहना क्या पीर है।।...........बहुत बढ़िया. 

आदरणीय केवल प्रसाद जी सादर,सुन्दर गजल कही है बहुत बहुत दाद कुबुलें.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 30, 2013 at 9:26pm

आ0 राम शिरोमणि भाई जी, उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 30, 2013 at 9:25pm

आ0 तनवीर भाई जी, उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर,

Comment by ram shiromani pathak on May 29, 2013 at 3:41pm

वाह वाह बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति हुई है आदरणीय भाई जी ///हार्दिक बधाई 

Comment by TARUN KUMAR SONI "TANVEER" on May 28, 2013 at 11:40pm

बहुत ही खुबसूरत ग़ज़ल है .

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 28, 2013 at 8:16pm

आ0 श्याम नारायण जी, आपके स्नेह और उत्साहवर्धन से मेरे आत्मबल को और अधिक दृढता मिली है।   आप बस यूं ही प्यार और स्नेह बनाए रखिए।   आपका तहेदिल से हार्दिक आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 28, 2013 at 8:15pm

आ0 आशुतोष भाई जी, आपका स्नेह और उत्साहवर्धन से मेरे आत्मबल को और अधिक दृढता मिली है।   आप बस यूं ही प्यार और स्नेह बनाए रखिए।   आपका तहेदिल से हार्दिक आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 28, 2013 at 8:10pm

आ0 कुन्ती मैम जी, आपका स्नेह और उत्साहवर्धन पाकर मेरा प्रयास सार्थक हो गया।   आपका तहेदिल से हार्दिक आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 28, 2013 at 8:08pm

आ0 आशीष नैथानी भाई जी, आपका स्नेह और सराहना पाकर मन गदगद हो गया।  मैं आपके स्नेह और मार्गदर्शन की सदा ही अपेक्षा रखता हूं।  आप बस यूं ही प्यार और स्नेह बनाए रखिए।   आपका तहेदिल से हार्दिक आभार। सादर,

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