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भारत है मेरा देश

भारत है मेरा देश इस पे  जान मैं दूंगा|

हुवा जो इसपे वार सीना तान मैं दूंगा||

 

खाया है इसका अन्न फिर हक भी हम देंगे|

इसकी बचाने लाज को हम जान भी देंगे||

 

आया जो शत्रु सामने उसे चीर हम देंगे|

यही मुल्क है हमारा ये पहचान हम देंगे||

 

ये हिन्द वतन मेरा मैं हूँ हिन्द का वासी|

है उर्दू मेरे दिल में और मैं हिंदी का भाषी||

 

ओ अम्न के दुश्मन अरे गद्दार तू सुन ले|

कहता जो खुद को पाक ओ नापाक तू सुन ले||

 

ये धरती हमारी इसे नापाक न करना|

आतंक की तू अपनी कोई चल न चलना||

 

तू देखता जो ख्वाब सच वो ख्वाब न होगा|

बनाया  एक  बांग्ला  अब  दूजा  भी  होगा||

 

गर ठान ली जो हमने तुझे जीने नही देंगे|

तुझे विश्व के नक़्शे में भी हम रहने न देंगे||

 

 

   मौलिक व् अप्रकाशित

   हरीश उप्रेती "करन"

 

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Comment

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Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 2, 2013 at 4:07pm
आदरणीय...हरीश जी,"" देश भक्ति रचना के लिऐ नमन""
Comment by Harish Upreti "Karan" on July 2, 2013 at 3:25pm

धन्यवाद आदरणीय राजेश जी......


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 2, 2013 at 3:01pm

देश भक्ति के इस भाव को नमन बहुत अच्छी कविता 

Comment by Harish Upreti "Karan" on July 2, 2013 at 12:48pm

धन्यावाद रविकर जी....

Comment by Harish Upreti "Karan" on July 2, 2013 at 12:44pm

धन्यवाद राहुल जी.....

Comment by RAHUL ROY on July 2, 2013 at 11:52am

शुभकामनायें-

Comment by रविकर on July 2, 2013 at 11:13am

बढ़िया प्रयास-
शुभकामनायें-

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