For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

देवों की भूमि में जलजला

नजारा पहाड़ों का क्या हो गया ये |

गावों का देखो निशाँ खो गया है||

जो मुझको थे प्यारे कहाँ खो गये वो|

अभी तक थे जागे कहाँ सो गये वो||

मौतों का थमता न क्यों सिलसिला है|

ये देवों की भूमि में क्यों जलजला है||

 

जहाँ कल तक था जीवन अब मृत्यु खड़ी है|

जिधर जाती  नजरें  बस  लाशें  पड़ी हैं||

 

ये मानव की करनी कहाँ लेके आई|

अपनी ख़ुशी को ये दुनिया मिटाई||

 

पहाड़ों  से  चीखे  बेबस  जिंदगी  है|

थी कल ख़ुशी अब निरस जिंदगी है||

 

वो घर था न केवल यहाँ बह गया जो|

किसी का तो सारा जहां लुट गया है||

        

                   हरीश उप्रेती "करन"

                 मौलिक व् अप्रकाशित

Views: 61

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by coontee mukerji on July 4, 2013 at 7:50pm

कुछ कहा नहीं जा सकता.....शायद होना ही था.प्रकृति कभी उधार नहीं छोड़ती.बस सब का कल्याण हो.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 4, 2013 at 7:38pm

देवभूमि में आयी विनाशकारी जलप्रलय पर बहुत यथार्थ प्रस्तुति दी है हरीश जी आपने..

इस भाव दशा पर क्या कहूँ.. दर्द के अतिरेक को क्या शब्द दूं..

बस शुभ की याचना ही है परमशक्ति से ..

Comment by Harish Upreti "Karan" on July 3, 2013 at 10:30pm

धन्यवाद् आदरणीय केवल प्रसाद जी........

Comment by Harish Upreti "Karan" on July 3, 2013 at 10:29pm

धन्यवाद आदरणीय अरुण जी....


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on July 3, 2013 at 9:03pm

आदरणीय हरीश जी, इस मार्मिक रचना के लिए बधाई.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on July 3, 2013 at 8:40pm

आ0 हरीश भाई जी, ^वो घर था न केवल यहाँ बह गया जो!  किसी का तो सारा जहां लुट गया हैAA^... संवेदनाओं व श्रध्दांजलि का सुन्दर भाव।  बधाई स्वीकारें।  सादर,

Comment by Sumit Naithani on July 3, 2013 at 2:22pm

बहुत ही सुंदर प्रस्तुति 

Comment by वेदिका on July 3, 2013 at 1:51pm

भावनात्मक विचारों का संग्रह!!

रचना पर बधाई!!  

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 3, 2013 at 1:42pm
बहुत खूब, आदरणीय..हरीश जी हार्दिक बधाई
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 3, 2013 at 11:10am

सामयिक रचना अच्छा प्रयास बधाई स्वीकारे श्री हरीश उत्प्रेती जी 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"छल गई रेत मुझे, निकला ये सहरा देखो आँख में सिमटा हुआ प्यार का दरिया देखो साँझ को जब भी ढका स्याह…"
4 minutes ago
Samar kabeer commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"जनाब गणेश जी "बाग़ी" साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल है, बधाई स्वीकार करें । 'बात चलेगी, तब…"
11 minutes ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"आपकी हौसला अफ़ज़ाई और आपके कीमती समय के लिए तहेदिल से शुक्रिया आदरणीय। आपकीं दुआएं मिलती रहे"
27 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"मोहतरमा अंजली गुप्ता 'सिफ़र' जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
29 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

छोटा वकील (लघुकथा)

"हमने तो सुना है कि बहुत ज़रूरी होने पर देर रात तक कोर्ट लग जाती है; वकील और जज साहिबान सब हाज़िर…See More
44 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"जनाब मुनीश तन्हा जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 4थे शैर में रदीफ़ बदल गई है?"
51 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन कुछ अशआर और वक़्त चाहते हैं,जैसे ,छटे शैर…"
55 minutes ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"मौलिक व अप्रकाशित माफी चाहती हूँ लिखना रह गया था"
1 hour ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"मुबारकबाद कबूल करें आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी। बेहद उम्दा पेशकश"
1 hour ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"आँधियाँ झेल रहे अपनी तरह से दोनोंबेल की झूल दरख्तों का अकड़ना देखो बहुत ख़ूब आदरणीय अजय जी मुबारक"
1 hour ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"बहुत बहुत ख़ूब आदरणीय समर कबीर जी"
1 hour ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"बहुत ही ख़ूबसूरत ग़ज़ल आदरणीय नीलेश जी"
1 hour ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service