For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दीवाने तो दीवाने हैं [सूफी गीत]

रचना ओ बी ओ नियमानुसार न होने और लेखक के अनुरोध पर हटा दी गई है |

एडमिन

2013071407

Views: 849

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Admin on July 14, 2013 at 4:12pm

ह्रदय से स्वागत है आदरणीय |

Comment by Neeraj Nishchal on July 14, 2013 at 4:09pm

आभार तो हमे आपका करना चाहिये
जो इतना सुन्दर मंच उपलब्ध कराया ।

Comment by Admin on July 14, 2013 at 4:02pm

//और निवेदन करता हूँ आप ये कविता हटा दीजिये//

आदरणीय नीरज मिश्रा जी, सहयोग हेतु बहुत बहुत आभार, आपके अनुरोध पर यह रचना हटाई जा रही है |

Comment by Neeraj Nishchal on July 14, 2013 at 3:43pm

आदरणीय प्रबन्धक जी
जवाब विलम्ब से दे पाने के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ ,,,,,_/\_
आदरणीय पाठक जी की बात तो मै नही समझ पाया क्यों की
लिंक नही खोल पाया पर जब आपने ऐसा कहा तो फिर मैंने छान बीन की
और ऐसा ज्ञात हुआ कि ये कविता फेसबुक के एक आध्यात्मिक पेज
ओशो शरणम् गच्छामि जिसके एडमिन मै और मेरा छोटा भाई हैं
उस पर मेरे भाई ने डाली थी और ये ज्ञात नही था मुझे ,,,,,,,
पर ये एक बड़ी गलती है और ओ बी ओ के नियम के विरुद्ध है मै
इसके लिए बहुत बहुत क्षमा प्रार्थी हूँ ...._/\_..
और निवेदन करता हूँ आप ये कविता हटा दीजिये हालाँकि मैंने
वहाँ से भी हटा दी है आप आश्वस्त रहें आगे से ऐसा नही होगा ।
सादर

Comment by बृजेश नीरज on July 13, 2013 at 10:19pm

आदरणीय नीरज जी यदि आप रचना को किसी शिल्प में बांधें तो अच्छा हो। आपके कथ्य तो बहुत सुंदर होते हैं परन्तु शिल्प का निर्वहन आप द्वारा न किया जाना आश्चर्य पैदा करता है।
सादर!


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 13, 2013 at 1:24pm

आदरणीय नीरज मिश्रा जी, भाई राम शिरोमणि जी का इशारा आपकी कविता आपकी नहीं होने की तरफ नहीं है बल्कि उनका इशारा यह है कि यह रचना ओ बी ओ पर प्रकाशित होने के पूर्व किसी और साईट पर प्रकाशित हुई है . 

कृपया स्पष्ट करें कि क्या यह रचना ओ बी ओ पर प्रकाशन से पूर्व किसी और साईट यथा ब्लागस्पाट, फेस बुक आदि पर प्रकाशित हुई थी ?

Comment by Neeraj Nishchal on July 13, 2013 at 11:11am

आदरणीय राम शिरोमणि पाठक जी
इस कविता की खामियाँ बताती हैं कि
ये मेरी कविता है और दूसरी बात
मेरी शैली आप अगर मेरी कवितायें
पढ़े जो यहाँ पोस्ट हुयीं हैं तो सबकी विधा
लगभग एक जैसी ही हैं .............
साभार .....................

Comment by Neeraj Nishchal on July 13, 2013 at 11:06am

धन्यवाद सुमीत जी

Comment by Neeraj Nishchal on July 13, 2013 at 11:05am

राजेश भाई भावनाओं में ऐसा बह जाता हूँ ।
जो लिख जाता है बस वही लिख पाता हूँ ।

Comment by ram shiromani pathak on July 12, 2013 at 9:00pm

https://www.google.co.in/url?sa=t&rct=j&q=&esrc=s&s...आदरणीय भाई साहब इस रचना को यहाँ भी पढ़ा जा सकता है ////बहुत सुन्दर //आपने ही लिखी है ये रचना ?????

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
9 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
13 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
15 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
22 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
yesterday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Wednesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service