For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कविता : बादल, सागर और पहाड़ बनाम पूँजीपति

बादल

 

बादल अंधे और बहरे होते हैं

बादल नहीं देख पाते रेगिस्तान का तड़पना

बादलों को नहीं सुनाई पड़ती बाढ़ में बहते इंसानों की चीख

बादल नहीं बोल पाते सांत्वना के दो शब्द

बादल सिर्फ़ गरजना जानते हैं

और ये बरसते तभी हैं जब मजबूर हो जाते हैं

 

सागर

 

गागर, घड़ा, ताल, झील

नहर, नदी, दरिया

यहाँ तक कि नाले भी

लुटाने लगते हैं पानी जब वो भर जाते हैं

पर समुद्र भरने के बाद भी चुपचाप पीता रहता है

इतना ही नहीं वो पानी को खारा भी करता जाता है

ताकि उसे कोई और न पी सके

 

पहाड़

 

पहाड़ सिर्फ़ ऊपर उठना जानते हैं

खाइयाँ कितनी गहरी होती जा रही हैं

इसकी परवाह वो नहीं करते

ज्यादा खड़ी चढ़ाई होने पर सबसे कमजोर हिस्सा

अपने आप उनका साथ छोड़ देता है

और इस तरह उनकी मदद करता है ऊँचा उठने में

एक दिन पहाड़ उस उँचाई से भी अधिक ऊँचे हो जाते हैं

जहाँ तक पहुँचने के बाद

विज्ञान के अनुसार उनका ऊपर उठना बंद हो जाना चाहिए

 

पूँजीपति

 

एक दिन अनजाने में

ईश्वर बादल, सागर और पहाड़ को मिला बैठा

उस दिन जन्म हुआ पहले पूँजीपति का

जिसने पैदा होते ही ईश्वर को कत्ल कर दिया

और बनवा दिये शानदार मकबरे

रच डालीं मकबरों की उपासना विधियाँ

 

तब से पूँजीपति ही

ईश्वर के नाम पर मजलूमों का भाग्य लिखता है

और उस पर अपने हस्ताक्षर कर ईश्वर की मोहर लगता है

----------

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 700

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 2, 2013 at 4:42pm

बादल, सागर और पहाड़ के प्रोपर्टीज को एन्कैप्सुलेट कर जैसा न आपने सबक्लास बनाया कि ऑब्जेक्ट रोबस्ट हुआ, समझिये बीटा टेस्ट पास कर गया है. पास तो करना ही था.

ऑब्जेक्ट-नेम भी अच्छा लगा -- पूँजीपति.  :-)))

ऊप्स कॉन्सेप्ट (Oops concept) लीनियर प्रोसेस नहीं, भाई, सीधा आउटकम पर नज़र रखता है, 

यानि सीधे डॉटा रिट्रीव्ड !!! 

बहुत-बहुत बधाई हो, आदरणीय धर्मेन्द्र भाई,  इस सफल रचना के लिए.

शुभम्

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 30, 2013 at 1:11pm

आदरणीय धर्मेन्द्र सर जी अलग अंदाज से लिखी गई बहुत ही सुन्दर रचना, बादल, सागर और पहाड़ की इतनी सुन्दरता से व्याख्या की है कि बस मजा आ गया ढेरों बधाई स्वीकारें.

Comment by ram shiromani pathak on July 28, 2013 at 6:27pm

सुंदर रचना///बधाई आपको आदरणीय धर्मेन्द्र जी 

Comment by arunendra mishra on July 28, 2013 at 6:13pm

बहुत ही सुन्दर रचना ..

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 28, 2013 at 10:43am

सुंदर रचना  प्रस्तुति पर ,बधाई आपको आदरणीय धर्मेन्द्र जी ..

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"मेरा प्रयास आपको अच्छा और प्रेरक लगा। हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और…"
2 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
3 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। "
3 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। "
3 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आजकल खूब हो रहा है ये चलन और कभी कभी विवाद भी। आपकी चिरपरिचित शैली में विचारोत्तेजक लघुकथा। बधाई…"
4 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"समसामयिक विषय है ये। रियायत को ठुकराकर अपनी काबलियत से आगे बढ़ना अच्छा है,पर इतना स्वाभिमान कम ही…"
4 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब। हार्दिक स्वागत आदरणीय मनन कुमार सिंह जी। समसामयिक और सदाबहार विषय और मुद्दों पर सकारात्मक और…"
4 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"चाहतें (लघुकथा) : बार-बार मना करने पर भी 'इच्छा' ने अपनी सहेली 'तमन्ना' को…"
4 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service