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मै अपनी तक़दीर पर कभी , रोया या नही रोया 

पर मेरे जज्बातों पर आसमा टूट के रोया |

मै क्या क्या बताऊ मे क्या क्या गिनाऊ ,

क्या नही पाया मैंने क्या नही खोया |

मेरी हर रात कटी है सो वीमारो के जैसे 

दर्द से जुदा होकर मै एक पल नही सोया |

मेरे जीने पे  जो जालिम , मातम मनाता रहा ,

मेरे मरने  पर वो जी भर के क्यों रोया |

मेरे दिल के जख्म फूलो से निखरते रहे   

मैंने कभी इनको मरहम से नही  धोया |

बडो की ये बड़ी बाते ,हमे देती रही है ये  नसीहत

अब काटो  बही जो  बीज वो तुमने था जो बोया |

 

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by बसंत नेमा on August 8, 2013 at 3:08pm

बहुत ही सुन्दर! हार्दिक बधाई आपको श्री अमन जी 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 8, 2013 at 2:47pm

"मेरे दिल के जख्म फूलो से निखरते रहे   

मैंने कभी इनको मरहम से नही  धोया" .............क्या खूब कहा है

"बडो की ये बड़ी बाते ,हमे देती रही है ये नसीहत
अब काटो बही जो बीज वो तुमने था जो बोया" .........सच कहा है आपने

हार्दिक बधाई , आदरणीय अमन जी

Comment by Shyam Narain Verma on August 8, 2013 at 1:02pm

बहुत ही सुन्दर! हार्दिक बधाई आपको! "

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