For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अपनी इस ग़ज़ल के साथ सभी को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देता हूँ

आये लौट आज़ादी आज अपनी जवानी में ।

के फहरा दो तिरंगा फिर हवाओं की रवानी में ।

उड़ा दो फिर वही बादल आसमाँ में गुलालों के ,
गुलाबी रंग मिल जाए आज फिर आसमानी में ।

हिमालय की पनाहों में शहीदों को सलामी दे ,
कोई तो गीत गूँजेगा आज गंगा के पानी में ।

बनायें उनके सपनों का चलो आज़ाद भारत हम ,
जिन्होंने ख्वाब देखा था ये अपनी जिंदगानी में ।

आँखों में नमी भरकर लिए मुस्कान होंठो पर ,
चलो कुछ देर बैठे हम फिर उनकी मेजबानी में ।

मौलिक व अप्रकाशित
नीरज

Views: 889

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 25, 2013 at 2:40pm

शब्दों में ओज और ऊर्जा की जितनी आवश्यकता आज है उतनी स्वतंत्र भारत के इतिहास में कभी नहीं रही थी. 

पहले दुश्मन भौतिक रूप से दिखता था, तो दीखता भी था. अब दिखता तो अवश्य है, किन्तु दीखता नहीं.
आपकी रचना प्रवाह में होने की दशा को प्राप्त करना चाहती है. जबकि आपने इसके अरमानों पर पानी फेरा हुआ है. रचना को कृपया उसका हक दें.  पंक्तियों में १२२२ १२२२ १२२२ १२२२ की मात्रिकता को निभायें, फिर मज़ा देखिये.
शुभेच्छाएँ
 

Comment by Neeraj Nishchal on August 19, 2013 at 11:06pm

आदरणीय आशुतोष मिश्रा जी बहुत बहुत अनुग्रह आपका ।

Comment by Neeraj Nishchal on August 19, 2013 at 11:06pm

आदरणीय ब्रिजेश जी बहुत बहुत आभार
कोशिश करूंगा की आगे से बहार भी लिख दूँ ।

Comment by Neeraj Nishchal on August 19, 2013 at 11:04pm

बहुत बहुत हार्दिक आभार जीतेन्द्र भाई ।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 19, 2013 at 8:37am

बेहतरीन भाव ..शहीदों की मेजवानी हमारा परम कर्तव्य है ..एक से बढ़कर एक लाजबाब शेर ...सक्षम हैं आपके भाव को पाठकों तक पहुचाने में ..सादर बधाई के साथ 

Comment by बृजेश नीरज on August 19, 2013 at 7:34am

बहुत ही सुन्दर भाव लिए है आपकी यह रचना। गज़ल के साथ उसकी बहर का जिक्र अवश्य किया करें जिससे कि पाठक शिल्प पर भी ध्यान दे सके। गेय रचना लिखते समय भाव के साथ साथ उसका शिल्प भी महत्वपूर्ण होता है।
आपके इस प्रयास पर आपको हार्दिक बधाई!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 18, 2013 at 6:29pm

उड़ा दो फिर वही बादल आसमाँ में गुलालों के ,
गुलाबी रंग मिल जाए आज फिर आसमानी में ।..........बहुत ही सुंदर भाव

बहुत बहुत बधाई आदरणीय नीरज जी

Comment by Neeraj Nishchal on August 18, 2013 at 12:44am

आदरणीया अन्नपूर्णा जी आपका बहुत बहुत
हार्दिक शुक्रिया ,
आप जादू की बात करती हैं पर सारा जादू तो परमात्मा
का रहता है हम कैसे जीते हैं कैसे बोलते हैं
कैसे देखते हैं कैसे सोचते हैं ये सब अपने आप
में एक बहुत बड़ा जादू है ,
और कविता उसकी देन है कोई भी कविता देख कर
हमे ये ख़याल आ जाता है कैसे बन गयी ये
इतनी सुन्दर कविता , ज़रूर वो हमे जादू जैसा लगता है
पर अगर हम खुद भी उसका एक करिश्मा हैं
उसका कोई जादू हैं
हम क्यों हैं कब तक हैं कैसे हैं हमे नही पता फिर भी हम हैं
इस से बड़ा चमत्कार और क्या होगा ।
_/\_प्रणाम ।

Comment by Neeraj Nishchal on August 18, 2013 at 12:32am

भाई विजय जी आपका बहुत बहुत अनुग्रह
आप जो विश्लेषण कर गए उसका
तो पता मुझे भी नही था ।

Comment by Neeraj Nishchal on August 18, 2013 at 12:28am

बहुत बहुत धन्यवाद बहुत बहुत आभार
सुमित भाई ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Saturday
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service