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तिरंगे को लहराता देख

लगता है

हम आज़ाद हैं

 

आज़ादी सापेक्ष होती है

 

आज़ाद हैं अंग्रेजों से

 

जिंदगी तो अब भी वैसी ही है

वही साँसें

वही चीथड़े

वहीं चाँद

टूटता तारा

वही कुआँ खोदना

फटी जेबें

वही बिवाइयाँ।

 

कहाँ बदला कुछ

राजाओं के रंग बदल गये

भाषा वही है

 

सत्ता का चेहरा बदलता है

चरित्र नहीं

आजादी का मतलब

निरंकुशता की समाप्ति तो नहीं

हिटलर मुखौटे पहन लेता है बस

 

फिर भी

इस गण के तंत्र में

जहाँ जन के मन की बात

कोई नहीं सुनता

‘जन-गण-मन’ गाना अच्छा लगता है।

-        बृजेश नीरज

(मौलिक व अप्रकाशित)

 

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Comment by बृजेश नीरज on August 27, 2013 at 7:15am

आदरणीय सौरभ जी आपका हार्दिक आभार! इसे और बेहतर करने का प्रयास करता  हूँ!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 25, 2013 at 11:59pm

एक सशक्त कविता के लिए हार्दिक बधाई,भाई बृजेश नीरजजी.

सार्थक कविता और शिल्प के लिहाज से समुन्नत कविता.

वैसे मुझे पूरा विश्वास है कि आप अब इसे और बेहतर कह सकते हैं.

शुभेच्छाएँ.

Comment by बृजेश नीरज on August 18, 2013 at 7:01pm

आदरणीय जितेन्द्र 'गीत' जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 18, 2013 at 6:25pm

"सत्ता का चेहरा बदलता है

चरित्र नहीं"..............रचना में इस पंक्ति को पढकर सच में  लगता है की, आज भी मानसिक रूप से हम सब गुलाम ही है,

सशक्त रचना पर बधाई स्वीकारे आदरणीय बृजेश जी

Comment by बृजेश नीरज on August 17, 2013 at 6:46pm

आदरणीय गिरिराज जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on August 17, 2013 at 6:46pm

आदरणीया वंदना जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on August 17, 2013 at 6:43pm

आदरणीय विजय मिश्र जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on August 17, 2013 at 6:42pm

आदरणीय शिज्जू जी आपका हार्दिक आभार!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 17, 2013 at 5:22pm

वाह !!! , बृजेश भाई , सुन्दर रचना , बधाई !!!!!

फिर भी

इस गण के तंत्र में

जहाँ जन के मन की बात

कोई नहीं सुनता

‘जन-गण-मन’ गाना अच्छा लगता है।

Comment by Vindu Babu on August 17, 2013 at 4:41pm
अन्तिम पंक्तियाँ बहुत ही प्रभावी हैं आदरणीय।
अन्तर बस इतना हो गया है अंग्रेजों के जाने के बाद,पहले गैरों से त्रस्त थी भारत माँ,आज अपनी ही संतानों से।
इस सफल रचना के लिए सादर बधाई आपको!

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