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ग़ज़ल - इल्म की रोशनी नहीं होती !

ग़ज़ल –

२१२२   १२१२   २२

इल्म की रोशनी नहीं होती ,

ज़िन्दगी ज़िन्दगी नहीं होती |

 

एक कोना दिया है बच्चों ने ,

और कुछ बेबसी नहीं होती |

 

रंग आये कि सेवई आये ,

तनहा कोई ख़ुशी नहीं होती |

 

दिल के टूटे से शोर होता है ,

ख़ामुशी ख़ामुशी नहीं होती |

 

सारे चेहरे छुपे मुखौटों में ,

दिल में भी सादगी नहीं होती |

 

माँ के आँचल से दूर हैं बच्चे ,

बाप से बंदगी नहीं होती |

 

जी हुज़ूरी करूँ सलामी दूं ,

मुझसे ये नौकरी नहीं होती |

 

झूठ छाया है हर रिसाले में ,

सच की सुर्खी कभी नहीं होती |

 

*दौरे हाज़िर भी एक बवंडर है ,

आँधियों की कमी नहीं होती |

*संशोधित 

(मौलिक और अप्रकाशित)

        - अभिनव अरुण 

          [१२०९२०१३]

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Comment

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Comment by Abhinav Arun on September 20, 2013 at 5:57am

हार्दिक धन्यवाद श्री बैद्यनाथ जी .स्नेह मिलता रहे यही कामना है !!

Comment by Saarthi Baidyanath on September 19, 2013 at 11:46pm

:
दिल के टूटे से शोर होता है ,

ख़ामुशी ख़ामुशी नहीं होती.....जिंदाबाद साहब ..कमाल का शेर है !..नमन :)

Comment by Abhinav Arun on September 19, 2013 at 4:19am

आ. महिमा जी हार्दिक आभार आपका ग़ज़ल आपका अनुमोदन प्राप्त कर कृतार्थ हुई | शुक्रिया !!

Comment by MAHIMA SHREE on September 18, 2013 at 10:53pm

दिल के टूटे से शोर होता है ,

ख़ामुशी ख़ामुशी नहीं होती

 

सारे चेहरे छुपे मुखौटों में ,

दिल में भी सादगी नहीं होती

 

दौरे हाज़िर भी एक बवंडर है ,

आँधियों की कमी नहीं होती.....बेहद सादगी से आपने गहरी बात कह दी बहुत -२ हार्दिक बधाई आदरणीय ..

 

 

Comment by Abhinav Arun on September 18, 2013 at 9:13pm

बहुत आभार श्री राम जी शुक्रिया 

Comment by ram shiromani pathak on September 18, 2013 at 7:51pm

बहुत बहुत बधाई इस उम्दा गज़ल पर आ० अभिनव अरुण जी /////सादर 

Comment by Abhinav Arun on September 15, 2013 at 8:50am
शुक्रिया डॉ ललित जी स्नेह मिला आभारी हूँ !
Comment by Dr Lalit Kumar Singh on September 15, 2013 at 6:42am

बधाई इस उम्दा गज़ल के लिए

Comment by Abhinav Arun on September 15, 2013 at 6:19am

आपकी साहसिक टिप्पणी के लिए शुक्रिया अखिलेश जी :-) 

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on September 14, 2013 at 10:11pm

जी हुज़ूरी करूँ सलामी दूं ,मुझसे ये नौकरी नहीं होती | 

--- चापलूसी पसंद भारत देश में चपरासी से प्रधान मंत्री तक यही तो कर रहा है।  अभिनव अरुण जी बधाई अच्छी गजल के लिए ।

 

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