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पूर्वाग्रह (लघुकथा)

 पूर्वाग्रह


नेहा कॉलेज  से घर लौट रही थी.रास्ते में  उसकी सहेली रश्मि मिल गई .रश्मि  का घर नजदीक ही था .उसने नेहा को थोड़ी देर गप -शप करने और चाय पीकर जाने का आग्रह किया..नेहा ने बात मान ली .बातों ही बातों में नेहा ने कहा .रश्मि आजकल  ``मैं बड़ी परेशान हूँ .कुछ दिनों के लिए मेरी सास आने वाली हैं ...वही ताने ..उलाहने ..अपने ज़माने की बातों से हमारी तुलना ..सच
बड़ी आफत है ...क्या करूँ?``रश्मि बोली .".देख नेहा बुरा मत मानना ....मैं भी तेरी तरह हूँ नए ज़माने की ही ..पर शायद दोनों की सोच में फर्क आ गया है ......जिस पति के साथ तेरा सुखमय जीवन बीत रहा है उसी की माँ के आने में
तुझे आफत क्यों दिखाई दे रही है ....अधिक तो नहीं पर एक बात सोच ....उनकी जगह अपने को रख .....कल तेरे बेटे की पत्नी का यही रुख होगा तो ?या सोच तेरी भाभी भी तेरी माँ के लिए ऐसा ही कहे तो ...कैसा लगेगा तुझे ..?
"
नेहा चुप रह गयी .घर लौटने तक उसकी विचार धारा पलट गयी .सच माँ तो माँ ही होती है .उसके पति की माँ है उसे  भी उतना ही -सम्मान देना चाहिए जितना वह अपनी माँ को देती है  .क्यों हम लोग पहले से ही इस पूर्वाग्रह से ग्रसित हो जाती हैं कि सास बुरी ही होगी ?घर पहुँचने तक उसके सारे अवसाद दूर  हो चुके थे .वह बच्चों के साथ उनकी दादी माँ के आने की
तैयारी में जुट गई .

अप्रकाशित एवं मौलिक लघुकथा
ज्योतिर्मयी पन्त

Views: 858

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Comment by Shubhranshu Pandey on November 1, 2013 at 10:05am

आ. ज्योतिर्मयी जी, 

नेहा ने अपने पति के सास की तरह ही अपनी सास के लिये तैयारी करनी शुरु कर दी. सुन्दर कथा. 

सादर.

Comment by savitamishra on October 30, 2013 at 7:28pm

prenadayak..:)

Comment by Jyotirmai Pant on October 30, 2013 at 4:53pm

आपका बहुत -बहुत आभार सरिता भाटिया जी .

Comment by Jyotirmai Pant on October 30, 2013 at 4:52pm

सुशील जोशी जी लघुकथा पसंद करने हेतु आपका ह्रदय से आभार .

Comment by Jyotirmai Pant on October 30, 2013 at 4:50pm

विजय मिश्र जी आपका हार्दिक आभार .

Comment by Jyotirmai Pant on October 30, 2013 at 4:48pm

अन्नपूर्णा बाजपेयी जी हार्दिक आभार .

 

Comment by Jyotirmai Pant on October 30, 2013 at 4:47pm

विशाल चर्चित जी समय देने और पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार .

Comment by Jyotirmai Pant on October 30, 2013 at 4:46pm

डा.आशुतोष बाजपेयी जी कहानी पसंद आई लेखन को सार्थकता मिली हार्दिक आभार व्यक्त करती हूँ .

Comment by Jyotirmai Pant on October 30, 2013 at 4:45pm

आपका हार्दिक आभार लक्ष्मण प्रसाद लाडीवाला जी .

 

Comment by Jyotirmai Pant on October 30, 2013 at 4:41pm

हार्दिक आभार मीना जी .

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