For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सॉरी सर (कहानी )अंक-4

सॉरी सर (कहानी )
लेखक - सतीश मापतपुरी
अंक-4 
 -------------- गतांक से आगे -------------------------
प्रो. सिन्हा के फ़ोन उठाते ही उधर से आवाज़ आई थी --- "मैं आपको एक बहुत बूरी खबर दे रहा हूँ प्रो.साहेब,जिस प्लेन 
से सोनाली सरकार आ रही थीं--------------- वह क्रैश कर गया ----------- सी इज नो मोर -----------" टेलीफोन का बेजान 
चोंगा उनके हाथों में झूल कर रह गया.बगल में बैठ कर होमवर्क कर रहे  अपने आठ वर्षीय पुत्र पर एक नज़र डालते हुए 
वह बाथरूम में जा घुसे थे. परिवार वालों ने उन पर दूसरी शादी के लिए काफी जोर डाला, यहाँ तक कि उनके बाल -
सखा एवं सहकर्मी,हिंदी के प्रोफ़ेसर वेणुगोपाल त्रिपाठी से भी उन पर दबाव डलवाया पर प्रो.सिन्हा टस से मस नहीं 
हुए.प्रो.सिन्हा ने यह कहकर प्रो.त्रिपाठी का मुँह बंद कर दिया था कि मैं तो अपने बेटे का मुँह देखकर ज़िंदा हूँअन्यथा  
सोनाली के बिना जीने की कल्पना भी नहीं करता.प्रो.त्रिपाठी सिन्हा और सोनाली के प्रेम- प्रसंग के राजदार थे और
सिन्हा साहेब की मन:स्थिति को भली भांति समझते थे,लिहाजा वे चुप्पी साध लिए.
            प्रो.सिन्हा जब भी तनाव में होते तो प्रो.त्रिपाठी के पास चले जाते. त्रिपाठी जी ही एकमात्र व्यक्ति थे जिनसे 
सिन्हा साहेब अपने दिल की बात खोलकर कह सकते थे.वह प्रो.त्रिपाठी के यहाँ जाने के लिए घर से निकलने ही
वाले थे कि किसी ने कालवेल बजाया.दरवाजा खोलते ही प्रो.सिन्हा चौंक पड़े---------------- सोनाली एक अधेड़ आदमी 
के साथ दरवाजे पर खड़ी थी. -------- " मैं डॉक्टर देवव्रत घोष हूँ."---------- साथ आये सज्जन ने नमस्कार करते हुए 
अपना परिचय दिया. डॉक्टर घोष एक जाने-माने सर्जन थे,लिहाजा सिन्हा साहेब को उनका नाम मालूम था.
शिष्टाचारवश ने उन्होंने डॉक्टर घोष का आवभगत किया. बातचीत में डॉक्टर ने बताया कि सोनाली उनकी भांजी है.
हम मंदिर से लौट रहे थे. इसकी ईच्छा हुई कि आपको प्रसाद देते हुए चलें.सोनाली अपने पापा से बहुत प्यार करती थी.
आज उनकी पुण्यतिथि है. सोनाली अपनी माँ के साथ कलकत्ता में रहती थी.पिछले साल माँ का भी निधन हो गया तो  मेरे पास यहाँ चली आई.सोनाली अनाथ है यह जानकर प्रो.सिन्हा के मन में पहली बार उसके लिए सहानभूति पैदा हुई और फिर  सोनाली उनके यहाँ एक घंटा के लिए शाम को पढ़ने आने लगी.
         प्रो.सिन्हा बड़े लग्न से सोनाली को साइक्लोजी पढ़ाने लगे.धीरे-धीरे उन्होंने महसूस किया कि सोनाली के
व्यवहार में एक बदलाव सा आता जा रहा है.वह अब पढ़ने में कम और उनके करीब आने और उन्हें स्पर्श करने
में ज्यादा रूचि लेने लगी है.वह किसी न किसी बहाने प्रो.सिन्हा के बिल्कुल करीब आकर सट जाती थी.एक बार
पेन्सिल छिलते वक्त ब्लेड से प्रो.सिन्हा कि अंगुली कट गयी तो सोनाली  झट से उनकी अंगुली अपने मुँह में
लेकर चूसने लगी.अपनी दिवंगत पत्नी की हमशक्ल एवं हमनाम नवयुवती के सामीप्य का असर धीरे -धीरे प्रो.सिन्हा पर होने लगा.यौवन का  धरातल फिसलन भरा होता ही है. धीरे - धीरे प्रो.सिन्हा के मन में सोनाली के
लिए अनुराग पैदा होने लगा.सोनाली घोष की सूरत में अब अक्सर प्रो.सिन्हा को सोनाली सरकार की सूरत नज़र
आने लगी.धर्म-अधर्म,सही-गलत,पाप-पुण्य दरअसल हमारी सोच एवं नज़र में होता है.जिस चीज को जिस सोच एवं नज़र से देखते हैं,हमें वह चीज वैसी ही दिखने लगती है.इंसान जो करता है उसे सही और उचित सिद्ध करने
के लिए हजार तर्क और उदाहरण खोज लेता है.प्रो.सिन्हा ने भी यह तर्क देकर कि ईश्वर ने उनकी सोनाली को
सोनाली घोष के रूप में लौटा दिया है.सोनाली घोष सोनाली सरकार कि स्मृति को सजीव रखने का सबसे अच्छा
माध्यम हो सकती है.सोनाली घोष का उनके जीवन में आना एक कुदरती संयोग है, सोनाली से प्यार करने को उचित माँ लिया.(क्रमश:)
---------------------- शेष अगले अंक में ---------------------------------------

Views: 353

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
2 hours ago
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Thursday
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service