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कुंडलिया छंद - लक्ष्मण लडीवाला

देखे भाई दूज में,  रिश्तो का संसार,

प्यारा भाई जा रहा,प्रिय बहना के द्वार  

प्रिय बहना के द्वार,बोला खिलाओ खाना 

भरकर ह्रदया नेह,प्यार से मुझे खिलाना

सदियों का इतिहास,भाई बहन के लेखे

आती भाई दूज, भाई बहन को देखे ||

(4)

सभी देव करते रहे, गौमाता में वास 

खुशहाली मिलती रहे,गाय रखे यदि पास 

गाय रखे यदि पास,न दूध दही का घाटा

बिना दही अरु दूध, शरीर रहे ये नाटा |

संतो का अनुरोध,गौ ह्त्या न करे कभी   

ब्रहमा विष्णु महेश,करते गौ पूजा सभी |

(मौलिक व् अप्रकाशित)

 

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Comment

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 13, 2013 at 12:08pm

सुन्दर अभिव्यक्ति बता उतशाहित करने और आवश्यक सुझाव हेतु आपका हार्दिक आभार श्री सुशिल जोशी जी, 

इन्हें इस प्रकार संशोधित किया जा सकता है,कराया बतावे-

देखे भाई दूज में,  रिश्तो का संसार,

प्यारा भाई जा रहा,प्रिय बहना के द्वार  

प्रिय बहना के द्वार,प्रेम से खाए खाना  

भरकर ह्रदया नेह,प्यार से मुझे खिलाना

सदियों का इतिहास,भाई बहन के लेखे

आती भाई दूज, भाई बहन को देखे ||

(4)

करते आये देव सब, गौमाता में वास             

खुशहाली मिलती रहे,गाय रखे यदि पास 

गाय रखे यदि पास,न दूध दही का घाटा

बिना दही अरु दूध, शरीर रहे ये नाटा |

करे सभी संकल्प,अब न गौ-वध सह-सकते

ब्रहमा विष्णु महेश,सभी गौ पूजा करते | 

 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 13, 2013 at 12:02pm

हार्दिक आभार आपका डॉ आशुतोष मिश्रा जी, सादर 

Comment by Sushil.Joshi on November 12, 2013 at 9:56pm

आ0 लक्ष्मण प्रसाद जी..... भावों का सुंदर संप्रेषण हैं दोनो ही छंदों में...... भाई दूज एवं गोवर्धन पूजा पर सुंदर अभिव्यक्ति है..... बधाई इस हेतु......... किंतु थोड़ा सा प्रयास करने पर रचनाओं में जो लयभंग हो रही है, उसे भी दूर किया जा सकता है.....

जैसे -

प्रिय बहना के द्वार, बोला खिलाओ खाना......

 I  I  I I S  S  S I, S S   I   S S  S S

इस पंक्ति में यति के तुरंत बाद दो गुरु आने से लय भंग हो रही है... बिल्कुल यही दूसरे छंद की निम्न पंक्ति में भी हो रहा है........

संतो का अनुरोध, गौ ह्त्या न करे कभी

S S S   I I S I,  S  S S  I  I S I  S

Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 12, 2013 at 4:42pm

इस सुंदर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई ..सादर 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 12, 2013 at 9:31am

कुंडलिया पसंद करने के लिए हार्दिक आभार आपका आ. अन्नपूर्णा बाजपेयी जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 12, 2013 at 9:30am

जी डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी | कोई त्रुटी हो तो अवश्य ध्यान में लाये, मै आभारी रहूंगा 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 12, 2013 at 9:27am

छंद पसंद करने के लिए हार्दिक धन्यवाद शिर रमेश कुमार चौहान जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 12, 2013 at 9:26am

छंद पसंद करने एवं अपनी राय व्यक्त करने हेतु हार्दिक आभार श्री रामशिरोमणि पाठक जी, एवं आ. सरिता भाटिया जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 12, 2013 at 9:24am

छंद पसंद करने एवं अपनी राय व्यक्त करने हेतु हार्दिक आभार श्री रामशिरोमणि पाठक जी, एवं आ. सरिता भाटिया जी 

Comment by annapurna bajpai on November 11, 2013 at 10:38pm

आदरणीय लड़ी वाला जी सुंदर कुण्डलिया हेतु बधाई । 

कृपया ध्यान दे...

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