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!!! मनमोहन रूप सॅंवार रहे !!!

!!! मनमोहन रूप सॅंवार रहे !!!
दुर्मिल सवैया- आठ सगण

मनमोहन  रूप  सॅंवार  रहे, छवि  देख रहे  जमुना जल में।
सब ग्वाल कमाल धमाल करें, झट कूद पड़े जमुना जल में।।
अधरों पर  ज्ञान भरी  मुरली, रस धार  बहे जमुना जल में।
गउ-ग्वालिन डूब गयीं रस में, तन  तैर रहे जमुना जल में।।

के0पी0सत्यम/ मौलिक व अप्रकाशित

 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 15, 2013 at 9:25am

बहुत बढ़िया आदरणीय केवल प्रसाद जी बधाई आपको

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on November 14, 2013 at 7:34pm

आ0 मीना जी ,  सवैया पर आपके अपार स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on November 14, 2013 at 7:34pm

आ0 अरून अनन्त भाईजी,  सवैया पर आपके अपार स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on November 14, 2013 at 7:32pm

आ0 आशुतोष भाईजी,  सवैया पर आपके अपार स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on November 14, 2013 at 7:29pm

आ0 सुशील भाईजी,  सवैया पर आपके अपार स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on November 14, 2013 at 7:29pm

आ0 भण्डारी भाईजी,  सवैया पर आपके अपार स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on November 14, 2013 at 7:27pm

आ0 गोपाल भार्इ जी, चन्द्र बिन्दी मान कर ही संवार लिखा है। सवैया पर आपके अपार स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by Meena Pathak on November 14, 2013 at 12:15pm

बहुत सुन्दर .. बधाई आप को | सादर 

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 14, 2013 at 11:51am

आदरणीय केवल भाई जी बहुत ही सुन्दर दुर्मिल सवैया रचा है आपने पढ़कर मन प्रसन्न हो गया वाह बहुत बहुत बधाई स्वीकारें

Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 14, 2013 at 11:34am

 आदरणीय केवल जी ..कान्हा के रस में डूबती शानदार रचना ..गउ-ग्वालिन डूब गयीं रस में, तन तैर रहे जमुना जल में।..इन पंक्तियों ने मन मोह लिया सादर 

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