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तेरे आने का सपना लेकर..

मैं बेखुद सी दीवानी सी ,
तेरी यादों में खोयी सी..
फिर से हर वो पल जीती हूँ..
जब..
तुम कहते थे...मैं चुप थी..
मुझको सुनने अब आजाओ..
फिर कुछ कानों में कह जाओ..
या बातों में मेरी खो के ..
सब भूल यहीं पे रुक जाओ..
कबतक मैं राह निहारूंगी..
दिल ही दिल तुम्हे पुकारूंगी..
फिर आँखें खुली रह जाएंगी..
मैं धड़कन संग खो जाउंगी..
तेरे आने का सपना लेकर..

Views: 413

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Comment by Lata R.Ojha on January 25, 2011 at 6:26pm
धन्यवाद गणेश जी  :)

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 21, 2011 at 10:11am
तुम कहते थे...मैं चुप थी..
मुझको सुनने अब आजाओ..

वाह क्या बात है , बहुत बढ़िया , सुंदर भाव के साथ बेहतरीन प्रस्तुति , बहुत खूब , बधाई स्वीकार करे ....
Comment by Lata R.Ojha on January 21, 2011 at 2:46am
Dhanyavaad Dharmendra ji aur Ratnesh Raman  Pathak ji :)
Comment by Dharmendra Shrivastava on January 20, 2011 at 10:50pm
आपकी कविता अत्यंत ह्रदयस्पर्शी लगी कविता के भावो में निहित अंतर्द्वंद एक हवा के झोके की तरह मेरे ह्रदय को झकझोर गया इसी तरह की रचनाये लिखते रहिये धन्यवाद
Comment by Ratnesh Raman Pathak on January 20, 2011 at 7:35pm
दिल ही दिल तुम्हे पुकारूंगी..
फिर आँखें खुली रह जाएंगी..
मैं धड़कन संग खो जाउंगी..
तेरे आने का सपना लेकर.
very attractive......thanks
Comment by Lata R.Ojha on January 20, 2011 at 7:15pm
Dhanyavaad Veerendra Jain ji  aur Raju ji :)
Comment by Raju on January 20, 2011 at 5:16pm
bahut hi badhiya kavita hai. ......
Comment by Veerendra Jain on January 20, 2011 at 3:53pm
waah.. lata ji...bahut hi  khubsurat... badhai aapko...

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