For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गर्म हवा है खूब यहाँ की ( गज़ल ) गिरिराज भंडारी

गर्म हवा है खूब यहाँ की

************************

2 2  2 2  2 2   2 2

.

जो भी मुझसे सम्बंधित है

सुख पाने से वो वंचित है

 

मौन यहाँ है सबसे अच्छा

कुछ कहना अब प्रतिबंधित है

 

मै अधिकार कहाँ से पाऊँ  

कुछ विशेष को आबंटित है

 

गर्म हवा है खूब यहाँ की

आज परिन्दा आतंकित हैं

 

अभी छाँव में धूप है शामिल

सारे सुखों मे दुख किंचित है

 

हरदम अड़चन मुझ तक आई

क्या ? कठिनाई नामांकित है

 

ये कैसी दुनिया है भाई

हर माथा सिकुड़ा, चिंतित है 

मधु भावों से आप सभी के

अब मेरा तन मन सिंचित है

 

***************************** 

मौलिक एवँ अप्रकाशित ( संशोधित )

Views: 757

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 8, 2013 at 12:12am

सादर आदरणीय


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 8, 2013 at 12:06am

शुक्रिया , आदरणीय सौरभ भाई जी ,  मै सुधार के लिये इसे भेज दूंगा !!!!  आपका पुनः आभार !!!!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 7, 2013 at 11:54pm

मैं आपकी इस ग़ज़ल को मुसलसल ग़ज़ल कभी नहीं कहूँगा, आदरणीय. हर शेर मिल कर हालाँकि एक माहौल ज़रूर बना रहे हैं लेकिन, सर, उनके अंदाज़ अलहदे ही हैं. यही तो ख़ासियत है इस ग़ज़ल के शेरों की.

इसी लिए आखिरी शेर के सानी में  पर  मुझे अतुक की तरह लगा.

सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 7, 2013 at 10:17pm

आदरणीय सौरभ भाई , आपकी सराहना पाना मेरे लिये तमगे से कम नही है ,  सराहना और उत्साह वर्धन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया !!!! - पर - ऊपर के शे र मे मै लगातार नकारात्मक बातें गिनवाने के बाद मै अंत मे ये कहना चाहता था कि -ये सब तो हैं मेरे साथ पर एक सुखद पहलू भी है मेरे पास वो है आप सब का मधु - भाव , अगर मै अपनी बात कह न पाया हो ऊँ तो मुझे बताइयेगा , मुझे अब  करने में कोई उज़्र नही है !!!! सादर !!!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 7, 2013 at 9:12pm

वाह वाह वाह !

ग़ज़ब ग़ज़ब ग़ज़ब !!

मन मुग्ध हुआ झूम-झूम गया आदरणीय..

आखिरी शेर के सानी का पर .. इसे अब करें तो कुछ और बात बने. आप देखियेगा. या, शायद आप ही सही हों ..

सादर .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 3, 2013 at 2:32pm

आदरणीय वीनस भाई , आपका गज़ल पर आना सुखद अनुभव होता है , !!!! गज़ल की सराहना के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया !!!!!

Comment by वीनस केसरी on December 3, 2013 at 2:29am

जो भी मुझसे सम्बंधित है

सुख पाने से वो वंचित है

 

मौन यहाँ है सबसे अच्छा

कुछ कहना अब प्रतिबंधित है

 

ये कैसी दुनिया है भाई

हर माथा सिकुड़ा, चिंतित है 



वाह वा विशेष बधाई ... शानदार


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 2, 2013 at 6:22pm

आदरणीय  एडमिन जी , इस शे र मे तकाबुले रदीफ दोष होने के कारण

शामिल छाँव में धूप अभी है  ----- इस मिसरे को -
छाँव, धूप में अभी है शामिल -  करने की कृपा करें ।  सादर !

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 2, 2013 at 6:12pm

आदरणीय अरुण अनंत भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया !!!!!! पर - के विषय मे सोच रहा हूँ भाई ,  गलत लगा तो सुधार लूंगा !!!! आपका आभार !!!!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 2, 2013 at 5:55pm

आदरनीय नीलेश भाई , आपका बहुत बहुत शुक्रिया , तकाबुले रदीफ मेरे ध्यान मे नही  था , आपने जैसा कहा है  सुधार कर लूंगा !!!!

बह्र की छूट बताने के लिये अलग से आपका धन्यवाद !!!! सराहना के लिये आपका आभारी हूँ !!!!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा किसी विसंगति से उभरती है और अपने पीछे पाठको के पीछे एक प्रश्न छोड़ जाती है। सबकुछ खुलकर…"
12 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश जी स्वयं के प्रचार प्रसार के लिए इस तरह के प्रायोजित कार्यक्रमों का चलन साहित्य और…"
28 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  जी ! //हापुस लँगड़ा नीलम केसर। आम सफेदा चौसा उस पर।।//... कुछ इस तरह किया जा सकता है.…"
35 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद मेरे इस प्रयास पर आपकी प्रतिक्रिया और सुझाव हेतु। बेटा या यार शब्द सामान्य या…"
46 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  जी ! आपके द्वारा इंगित पंक्ति को /मिल धमाल जन खूब मचाते। पग-पग रंग गुलाल उड़ाते।।/ इस तरह…"
46 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आदरणीय अजय जी।"
47 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"जी, शुक्रिया।"
50 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आदरणीय अखिलेश जी।"
50 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय शेख शहजादजी पूरी कथा और इस  कथा का भाव मेरी समझ से बाहर है।  गुणीजन ही इस पर…"
51 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आभार भाईसाब "
1 hour ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय शेख शहजादजी शास्त्रीय गीत संगीत में रुचि न रखने वाले से अधिकतम सहयोग राशि (चंदा ) जबरदस्ती…"
1 hour ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"तरही मिसरे पर ग़ज़ल पर अच्छा प्रयास है आदरणीय। विस्तृत समीक्षा के लिए आदरणीय तिलकराज जी उपयोगी…"
1 hour ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service