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अकुला रही सारी मही .(अन्नपूर्णा बाजपेई)

अकुला रही सारी मही

किसको पुकारना है सही ।

 

सोच रही अब वसुंधरा

कैसा कलुषित समय पड़ा 

बालक बूढ़े नौजवान

गिरिवर तरुवर आसमान

किसको पुकारना .........

अखंड भारत का सपना

देखा था ये अपना

खंडित हो कर बिखर रहा

न जन मानस को अखर रहा

अकुला रही .................

ढूँढने पर भी अब मिलते नहीं 

राम कृष्ण से पुरुषोत्तम कहीं 

गदाधर भीम अर्जुन धनु सायक नहीं 

गांधी सुभाष भगत  से नायक नहीं

अकुला रही .............

रण बांकुरों से वसुंधरा

हर युग मे अल्हादित रही

किन्तु अहो ! क्या कोई

बचा अब बांका लाल नहीं

अकुला रही सारी मही

किसको पुकारना ............ 

अप्रकाशित एवं मौलिक    

( संशोधित रचना )

Views: 522

Comment

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Comment by annapurna bajpai on December 14, 2013 at 9:37pm

आदरणीय आशुतोष मिश्रा जी , अरुण जी , राम शिरोमणि जी एवं  प्रिय वंदना आप सभी का हार्दिक आभार । 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 5, 2013 at 9:11am

धरती का दर्द ..जो आपने महसूस किया .बिलकुल सही है ..आपको ढेरों बधाई 

Comment by Vindu Babu on December 5, 2013 at 9:05am

आदरणीया अन्नपूर्णा जी नमस्ते।

मही की व्यथा को अभियक्ति देने के लिए आपको बधाई।

रचना महत्वपूर्ण कथ्य से सजी है।

सादर

Comment by ram shiromani pathak on December 5, 2013 at 12:30am

आदरणीया अन्नपूर्णा जी , बहुत सुन्दर  रचना........हार्दिक बधाई.

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 4, 2013 at 4:32pm

बहुत ही सुन्दर रचना आदरणीया अन्नपूर्णा जी बधाई स्वीकारें

Comment by annapurna bajpai on December 3, 2013 at 11:18pm

आ0 मीना जी , आ0 भण्डारी जी , आ0 कुंती दीदी , आ0 डॉ गोपाल नारायण जी आप सभी के लिए हार्दिक आभार । 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 3, 2013 at 6:09pm

अन्नपूर्णा  जी i

धरती माँ की  इस व्यथा का हरण करने वाला तो कोई नज़र  नहीं आता i

किसी अवतार की ही प्रतीक्षा  करनी होगी पर तब तक हम -------=

मधुर भावाभिव्यक्ति के लिए सुभकामनाये i

Comment by coontee mukerji on December 3, 2013 at 4:16pm

बहुत सुंदर रचनाअन्नपूर्णा जी.हार्दिक बधाई.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 3, 2013 at 2:01pm

आदरणीया अन्नपूर्णा जी , बहुत सुन्दर भाव , बहुत सुन्दर रचना के लिये आपको बधाई !!!!!!

Comment by Meena Pathak on December 3, 2013 at 1:17pm

बहुत सुन्दर रचना आ० अन्नपूर्णा जी , बधाई आप को 

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