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(एक)

 

तुम क्या चुकाओगे

मेरी मेहनत की कीमत

मेरी जवानी

मेरे सपने

मेरी उम्मीदें

सब-कुछ तो दफ्न है

तुम्हारी इमारतों में।

 

(दो)

 

जब चलती हैं  

झुलसा देने वाली गर्म हवाएँ

कवच बन जातीं है

यही सूरज की किरणें

हमारे लिए ।

 

मुसलधार बारिश

जब हमारे बदन को छूती है

फिर से खिल उठता है  

हमारा तन

ऊर्जावान हो जाता है

जिस्म का रोम- रोम ।

 

हमारे पसीने की गंध

ला देती है गर्मी

पिघला देती है

कड़कड़ाती ठंड को ।

 

बदलता है मौसम

हमारे लिए

हम नहीं बदलते

मौसम के साथ ।

(मौलिक एवं अप्रकाशित) 

 

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Comment

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Comment by नादिर ख़ान on January 26, 2014 at 12:22pm

आदरणीया डॉ प्राची जी मार्गदर्शन के लिए आभार ...

बेहतर करने की कोशिश जारी है पर उस दिशा में ज़्यादा सफलता नहीं मिल पा रही है ।

कृपया इसी तरह मरदर्शन बनाये रखें ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 22, 2014 at 8:59pm

तुम क्या चुकाओगे

मेरी मेहनत की कीमत

मेरी जवानी

मेरे सपने

मेरी उम्मीदें

सब-कुछ तो दफ्न है

तुम्हारी इमारतों में।..................सार्थक सुन्दर क्षणिका 

बदलता है मौसम

हमारे लिए

हम नहीं बदलते

मौसम के साथ ..................वाह बहुत सुन्दर भाव 

फिर भी, दूसरी क्षणिका थोड़ी कथ्य सांद्रता की मांग करती सी लगी 

इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई आ० नादिर खान जी 

Comment by नादिर ख़ान on January 20, 2014 at 6:22pm

आदरणीय जितेंद्र जी,आदरणीय अखिलेश श्रीवास्तव जी,आदरणीय बृजेश जी एवं आदरणीय अरुण शर्मा जी, मेरे प्रयास को आप लोगों ने सराहा बहुत बहुत शुक्रिया | कोशिश सार्थक हुई ....

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 20, 2014 at 2:03pm

बहुत ही सुन्दर क्षणिकायें आदरणीय नादिर जी बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by बृजेश नीरज on January 20, 2014 at 12:07am

अच्छी क्षणिकाएँ हैं आदरणीय! आपको बहुत-बहुत बधाई!

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on January 19, 2014 at 5:31pm

आदरणीय नादिर भाई जी,

उच्च भाव , खूबसूरत शब्द संयोजन ,  पूरी रचना पर हार्दिक   बधाई स्वीकार करें ॥

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on January 19, 2014 at 9:49am

बदलता है मौसम

हमारे लिए

हम नहीं बदलते

मौसम के साथ ।.............आपकी लेखनी को नमन आदरणीय नादिर साहब

Comment by नादिर ख़ान on January 17, 2014 at 11:46pm

आदरणीया  अन्नपूर्णा जी हौसला अफजाई के लिए तहेदिल से शुक्रिया .........

Comment by नादिर ख़ान on January 17, 2014 at 10:32pm

आदरणीय गुमनाम जी आपका बहुत शुक्रिया .......

Comment by annapurna bajpai on January 17, 2014 at 10:28pm

आ0 नादिर भाई जी बधाई आपको इस सुंदर रचना के लिए । 

कृपया ध्यान दे...

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