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मीरा छोड़ सब तेरी गली मोहन चली आयी

शेर -

"प्रीत  की लगन है ये , किसी ने न जानी है ।
सबकी समझ में आती  नही ये कहानी है ।"

मीरा छोड़ सब तेरी गली मोहन चली आयी ।
न आया तू तो तेरे द्वार पर जोगन चली आयी ।

कि इकतारे की सरगम पर विरह के गीत गाती है ।
दीवानी बावरी बेसुध तुम्हारी और आती है ।

जर्जर तन निगाहों में लिए सावन चली आयी ।
न आया तू तो तेरे द्वार पर जोगन चली आयी ।

देह भी चूर है थक कर और पैरों में छाले हैं ।
सूखते लब तुम्हारे नाम की माला सभाले हैं ।

कि प्रेमी पर फ़िदा होने आज प्रेमिन चली आयी ।
न आया तू तो तेरे द्वार पर जोगन चली आयी ।

गुज़ारें हैं बरस कितने तुम्हारी इंतज़ारी में ।
मिलन कि आस में पल पल जली है बेकरारी में ।

न आया जब पिया लेने तो खुद दुलहन चली आयी ।
न आया तू तो तेरे द्वार पर जोगन चली आयी ।

सुना है सांवरे तेरा बड़ा है नाम दुनिया में ।
मगर ये तेरे पीछे हो गयी बदनाम दुनिया में ।

सजनी अपने साजन के आज आँगन चली आयी ।
न आया तू तो तेरे द्वार पर जोगन चली आयी ।

मौलिक व अप्रकाशि

नीरज  "प्रेम"

Views: 759

Comment

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Comment by Neeraj Nishchal on February 7, 2014 at 11:52am

आदरणीया अन्नपूर्णा जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

Comment by Neeraj Nishchal on February 7, 2014 at 11:51am

आदरणीय जीतेन्द्र भाई बहुत बहुत धन्यवाद आपका ।

Comment by Neeraj Nishchal on February 7, 2014 at 11:49am

कुंती जी बहुत बहुत आभार आपका ।

Comment by Neeraj Nishchal on February 7, 2014 at 11:48am

आदरणीय मीना जी बहुत बहुत आभारी हो रखा हूँ आपका ।

Comment by Neeraj Nishchal on February 7, 2014 at 11:44am

आदरणीय अखिलेश जी अदा करता हूँ शुक्रिया तहे से आपका ।

Comment by annapurna bajpai on February 6, 2014 at 1:57am

बहुत सुंदर , अद्भुत बधाई आपको । 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on February 4, 2014 at 11:23pm

बेहद सुंदर रचना आदरणीय नीरज जी, हार्दिक बधाई आपको

Comment by coontee mukerji on February 4, 2014 at 10:03pm

प्रेम रस में डुबी एक सुंदर रचना.

Comment by Meena Pathak on February 4, 2014 at 6:48pm

बहुत सुन्दर ..... बधाई 

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on February 4, 2014 at 11:46am

आदरणीय नीरज भाई,

बावरी मीरा का सुंदर चित्रण सुंदर शब्दों में किया है , हार्दिक बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

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