For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कवि
कौन कहता है
मैं कवि हूँ और वह नहीं ?
मैं पेट भर खाने के बाद
बरामदे की गुनगुनी धूप में बैठा हूँ
प्रकृति दर्शन के लिए –
वह,
भूखे पेट
एक कटी पतंग की डोर थामने
आसमान की ओर बेतहाशा भागा जा रहा है
मगर,
आसमान है कि
उससे दूर हटता जा रहा है –
बादल, क्षितिज और
एक कटी पतंग को
अपनी नीलिमा की ओढ़नी में छुपाकर,
कविता की लकीर खींचता हुआ !!!

(मौलिक तथा अप्रकाशित रचना)

Views: 626

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on February 11, 2014 at 3:20am

भाई राम शिरोमणि जी, जब समझ में नहीं आया तो प्रशंसा कैसे कर दी आपने!! खैर, प्रशंसा सबको पसंद है, मुझे भी क्योंकि मैं भी तो एक साधारण इंसान हूँ. आपका हार्दिक आभार. मैंने वंदना जी को जो उत्तर दिया है उससे आपकी जिज्ञासा भी संतुष्ट होगी, ऐसी मेरी आशा है. सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on February 11, 2014 at 3:15am

आदरणीय अरुन शर्मा अनंत जी, आपका हार्दिक आभार.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on February 11, 2014 at 3:14am

आदरणीया वंदना जी, मेरी रचना को पढ़ने के लिए आभार. यदि आप बाकी पंक्तियों का अर्थ समझ गयी होतीं तो अंतिम दो पंक्तियाँ पहेली न बनती. "वह" एक छोटा सा बच्चा है जो गरीब है, भूखा ही रहता है. "आसमान" उसकी अभिलाषा या लक्ष्य है. "बादल" उसके सपने हैं, "क्षितिज" उसकी सीमा - एक ऐसी रेखा जो रहते हुए भी नहीं है. "कटी पतंग की डोर" वह अवसर है जो उसके भाग्य में आते-आते भी छूटता नज़र आता है. फिर भी "वह" "आसमान" की ओर भाग रहा है क्योंकि उसमें भावनाएँ हैं, कल्पना है, साहस है, सरलता है, चाह है. जब दर्द भी हो और इतना कुछ साथ हो तो कविता का जन्म होता है - एक भूखे बच्चे का सपना, एक भूखे समाज की ज़िंदगी की कविता. ऐसी कविता जिसके पास शब्द नहीं हैं मात्र एक अनुरणन है. इसीलिए हम कविता की केवल एक "लकीर" खिंचती हुई देख रहे हैं.  आशा है मेरी सोच आपसे साझा कर पाया कुछ-कुछ. सादर.

Comment by रमेश कुमार चौहान on February 10, 2014 at 8:15pm

सुंदर , बधाई आपको


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 10, 2014 at 5:42pm

आदरणीय , सुन्दर रचना के लिये आपको बधाइयाँ ॥

Comment by ram shiromani pathak on February 10, 2014 at 3:06pm

सच में बहुत गहराई है रचना में, सुन्दर अतीव सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय हार्दिक बधाई आपको//आदरणीया वंदना जी से सहमत हूँ,अल्प विवेक के कारण मै भी नहीं समझ पाया //////////   सादर

Comment by अरुन 'अनन्त' on February 10, 2014 at 11:57am

आदरणीय सर बहुत ही सुन्दर रचना हार्दिक बधाई आपको

Comment by Vindu Babu on February 10, 2014 at 5:16am

सहज और अच्छी कविता बन पड़ी है आदरनीय।

निवेदन है सर, अंतिम दो पंक्तियाँ मुझे खूब स्पष्ट नहीं हो पायीं.

अपनी नीलिमा...मतलब कविकर्म?

कविता की लकीर खींचता हुआ....कहाँ,कैसे?

सादर शुभकामनायें...


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on February 10, 2014 at 3:06am
आपका हार्दिक आभार आदरणीय श्याम नारायण जी.
Comment by Shyam Narain Verma on February 7, 2014 at 10:29am
बहुत बढ़िया रचना आदरणीय.....

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
6 hours ago
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Thursday
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service