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रति भी तू,कामना भी तू,                                                                  

कवि  की सुंदर कल्पना है,

प्रेम से भरी मूरत है तू,

कुदरत का कोई करिश्मा है ...

सांवली रंगत,सूरत मोहिनी,

कातिलाना तेरी अदाएं है,

सात सुरों की सरगम तू,

फूलों की महकती डाली है....

नयन तेरे काले कज़रारे है,

लब ज्यूँ मय के प्याले है,

जिन पर हम दिल हारे है,

उल्फ़ते-राज़ ये गहरे है ....

हुस्नों-हया की मल्लिका तू,

हर इक दिल की धडकन है,

फुरसत से बनी प्रतिमा तू,

ईश्वर की निराली रचना है...

("मौलिक व अप्रकाशित")                           

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Comment by ASHISH KUMAAR TRIVEDI on August 11, 2016 at 10:55am

सुंदर रचना

Comment by Aarti Sharma on February 13, 2014 at 8:38pm

बेहद शुक्रिया annapurna bajpai मैडम..सादर

Comment by annapurna bajpai on February 13, 2014 at 8:01pm

आ0 आरती जी बहुत सुंदर रचना , बधाई आपको । 

Comment by Aarti Sharma on February 13, 2014 at 6:48pm

Meena Pathak जी आपका तहेदिल से शुक्रिया कविता पसंद करने के लिए ..आभार 

Comment by Aarti Sharma on February 13, 2014 at 6:47pm

रचना सराहने के लिए सहृदय धन्यवाद आदरणीय  Laxman Prasad Ladiwala सर..आभार

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 13, 2014 at 6:09pm

ईश्वर की निराली रचना. सौन्दर्य की प्रतिमा है, तभी तो कवि की सुंदर कल्पना है | सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति की लिए बधाई 

Comment by Meena Pathak on February 13, 2014 at 3:07pm

बहुत सुन्दर भावों से सजी रचना .. बहुत बहुत बधाई 

Comment by Aarti Sharma on February 12, 2014 at 11:49pm

भावों की गहराई समझने के लिए हार्दिक आभार आदरणीय जितेन्द्र 'गीत' जी..

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on February 12, 2014 at 11:37pm

बेहद खुबसूरत कोमल भाव, बधाई स्वीकारे आदरणीया आरती जी

Comment by Aarti Sharma on February 12, 2014 at 11:07pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीया  shashi purwar जी..आभार

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