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वसंत

 

बीता कटु शीत शिशिर 

मोहक  वसंत आया

 

पुष्प खिले वृन्तो पर

मुस्काये हर डाली

मादक महक चहुँ दिशा

भरमाये मन आली

तरुण हुई धूप खिली

शीत का अंत आया

बीता कटु शीत शिशिर 

मोहक  वसंत आया

 

प्रिया की सांसों सी

मद भरा ऊषा अनिल  

अंग अंग उमंग रस

जग लगे मधुर स्वप्निल

कुहूक  बोले कोयल

कवि नवल छंद गाया

बीता कटु शीत शिशिर 

मोहक  वसंत आया ..

 

 

आम्र वृक्ष स्वर्ण मौर

महुआ  रस टपकाया

देखूं दृश्य अनिमेष

किसने चित्र बनाया

अभिसार पूरित  ह्रदय

जग प्रेम दिगंत छाया

बीता कटु शीत शिशिर 

मोहक  वसंत आया .

 

त्याग शर्म अवगुंठन

दे रही प्रणय  निमंत्रण

वृक्ष लता लिपटाया 

नगर नगर हर उपवन 

हर कोने   में वसुधा

के हर्ष अनंत छाया

बीता कटु शीत शिशिर 

मोहक  वसंत आया .

..... नीरज कुमार नीर  

 

 मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by Neeraj Neer on March 23, 2014 at 8:30am

बहुत आभार आदरणीय सौरभ जी आपकी सराहना ने मन प्रफुल्लित कर दिया .


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 22, 2014 at 11:36pm

गीत विधा पर पर एक गंभीर प्रयास के लिए हृदय से बधाई नीरज नीर भाई.
आपने वासंतिक वातावरण को अपनी प्रस्तुति के माध्यम से आच्छादित करने का सुन्दर प्रयास किया है. हाँ, पंक्तियों में शब्द-संयोजन शब्दों के भार तले आ गया प्रतीत हो रहा है. वैसे ढेर सारी बधाई आपको कि इस तरह आपका कोई प्रयास पहली बार देख रहा हूँ. बहुत खूब !
शुभेच्छाएँ

Comment by Neeraj Neer on March 1, 2014 at 8:59pm

आपका हार्दिक आभार आदरणीय अन्नपूर्णा जी .. 

Comment by annapurna bajpai on March 1, 2014 at 1:31pm

सुंदर गीत हेतु बधाई स्वीकारें , आ0 नीरज ' नीर ' जी । 

Comment by Neeraj Neer on February 26, 2014 at 8:51am

आदरणीय गिरिराज भंडारी साहब आपका हार्दिक धन्यवाद महोदय .. 

Comment by Neeraj Neer on February 26, 2014 at 8:51am

आभार आदरणीया कल्पना रामानी साहिबा .. सराहना एवं प्रोत्साहन के लिए ह्रदय ताल से धन्यवाद .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 25, 2014 at 11:16pm

आदरणीय नीरज भाई , सुन्दर बसंत गीत की रचना के लिये बधाइयाँ ॥

Comment by कल्पना रामानी on February 25, 2014 at 10:57pm

बसंत का सुंदर वर्णन किया है आपने आदरणीय नीरज जी, हार्दिक बधाई

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