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चल रहे थे अकेले हम वो मिल गये
साथ उनका मिला बुझे दीप जल गये

बीत गये हमारे पल इंतजार के
बंध गये थे हम धागो में प्‍यार के
जिन्‍दगी में चाहत के फूल खिल गये
साथ उनका मिला बुझे दीप जल गये
चल रहे थे अकेले हम वो मिल गये

हर चाहतो को मेरी जानने लगे
आँखो की भाषा को पहचाने लगे
जीवन के रंग ढ़ग सभी बदल गये
साथ उनका मिला बुझे दीप जल गये
चल रहे थे अकेले हम वो मिल गये

इक दिन जाने कैसा आया जलजला
टूट गया उसके आने का सिलसिला
भूले प्‍यार मेरा अब वो बदल गये
साथ उनका मिला बुझे दीप जल गये
चल रहे थे अकेले हम वो मिल गये

बीता इक जमाना उनको गये हुए
खुले जो पल पल लब उनको बंद हुए
खुशीयाँ अखंड के सपने सब छल गये
साथ उनका मिला बुझे दीप जल गये
चल रहे थे अकेले हम वो मिल गये

अखंड गहमरी मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Akhand Gahmari on April 17, 2014 at 8:28pm

उत्‍साहवर्धन के लिये हम आपके आभारी है आदरणीय जितेन्‍द्र गीज   जी

Comment by Akhand Gahmari on April 17, 2014 at 8:28pm

उत्‍साहवर्धन के लिये हम आपके आभारी है आदरणीय  गिरिराज भंडारी   जी

Comment by Akhand Gahmari on April 17, 2014 at 8:28pm

उत्‍साहवर्धन के लिये हम आपके आभारी है आदरणीया राजेश कुमारी  जी

Comment by Akhand Gahmari on April 17, 2014 at 8:28pm

उत्‍साहवर्धन के लिये हम आपके आभारी है आदरणीया annapurna bajpai जी

Comment by Akhand Gahmari on April 17, 2014 at 8:28pm

उत्‍साहवर्धन के लिये हम आपके आभारी है आदरणीया Meena Pathak जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 11, 2014 at 6:12pm

आदरणीय अखंड भाई , सुन्दर गीत रचना की है , बधाइयाँ !! गेयता मे कमी ज़रूर है !!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 11, 2014 at 10:32am

सुन्दर रचना आ० अखंड जी 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 10, 2014 at 11:33pm

बहुत सुंदर रचना, बधाई स्वीकारें आदरणीय अखंड जी

Comment by annapurna bajpai on April 10, 2014 at 2:07pm

सुंदर गीत , बधाई आपको । 

Comment by Meena Pathak on April 9, 2014 at 8:10pm

बहुत सुन्दर 

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