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चोट खाते रहे मुस्कुराते रहे
प्यार के फूल हम तो खिलाते रहे
अब भरोसा नहीं जिन्दगी का हमे
दर्द सह कर उसे हम मनाते रहे
जिन्दगी प्यार उनको सिखाती रही
और वो जिन्दगी को भुलाते रहे
साथ वो चल दिये है किसी गैर के
प्रीत की रीत हम तो निभाते रहे
आज की रात हम मर न जाये कही
पास अपने उसे हम बुलाते रहे
बात जब है चली बेवफाई की तो
बेवफा कह हमे वह बुलाते रहे
बात उनकी करे ना करे हम मगर
याद मे उन की आँसू बहाते रहे
मौलिक एवं अप्रकाशित अखंड गहमरी
Comment
आपके उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन के हम सदैव आकांक्षी है मेरा प्रणाम स्वीकार करे आदरणीयशिज्जु शकूर जी
आपके उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन के हम सदैव आकांक्षी है मेरा प्रणाम स्वीकार करे आदरणीय arun kumar nigam जी
आपके उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन के हम सदैव आकांक्षी है मेरा प्रणाम स्वीकार करे आदरणीय जितेन्द्र गीत जी
बहुत सुंदर आदरणीय अखंड जी, हार्दिक बधाइयाँ आपको
पहले-पहले प्यार की स्मृतियों में डूबी रचना केलिए बधाई....................
बहुत खूब आदरणीय अखंड भाई बधाई स्वीकार करें
सादर,
जिन्दगी प्यार उनको सिखाती रही
और वो जिन्दगी को भुलाते रहे.....बहुत अच्छी पक्तियाँ है..आपको सुंदर रचना केलिये हार्दिक बधाई है.
सुंदर रचना के लिए बहुत बधाई सादर............. |
बहुत खूब,सुन्दर
क्या बात है .. बहुत खूब ... ढेरों बधाई स्वीकारें | सादर
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