For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरे हाथों में तारे देख कर वो क्यूँ जला है

१२२२   १२२२    १२२२   १२२

मेरे हाथों में तारे देख कर वो क्यूँ जला है

मेरे मालिक तेरा इंसान जाने क्या बला है

 

लड़ा ताउम्र दरिया हौसलों के साथ अपने

लगाया था गले जिनको उन्हें ही क्यूँ खला है

 

घुसे थे झाड़ियों में तो बहुत ज्यादा संभलकर

थे हम भी बेखबर उस नाग से जो घर पला है   

 

बड़ा मुश्किल है फहराना ये परचम शोहरत का

यकीनन  कारवा पहले या आखिर में चला है

 

नहीं शिकवा गिला हमको कभी भी आपसे था

कभी खिलता ये  गुल भी नागफनियों में भला है

 

हकीकत की ही तो मैं सच बयानी कर रहा हूँ  

सफ़र में जो चला है वो अकेला ही चला है

 

जिगर के गहरे में ये अजनबी सा डर है मेरे

भला इंसान क्यूँ लगता नहीं मुझको भला है

 

  

 

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 677

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Maheshwari Kaneri on June 13, 2014 at 7:18pm

बहुत खूबसूरत गजल ,आशुतोष जी  हौसला बढाने के लिए आभार आप का 

Comment by Meena Pathak on June 12, 2014 at 9:51pm

क्या बात है .. बहोत खूब ... बधाई 

Comment by annapurna bajpai on June 12, 2014 at 7:56pm

वाह !! बहुत खूबसूरत गजल , आ0 आशुतोष जी । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 12, 2014 at 6:01pm

आदरनीय आशुतोष भाई , बहुत खूब सूरत ग़ज़ल हुई है , आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥

जिगर के गहरे में ये अजनबी सा डर है मेरे

भला इंसान क्यूँ लगता नहीं मुझको भला है --- बहुत खूब भाई जी , बधाई ॥

 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 2:02pm

आदरणीय लक्षमण जी हौसल अफजाई के लिए तहे दिल शुक्रिया सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 2:00pm

आदरणीय गोपाल सर..आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए आशीर्वाद है ..जिसकी मैं सतत कामना करता हूँ ..हार्दिक धन्यवाद और सादर प्रणाम के साथ 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 1:59pm

आदरणीया डॉ प्राची जी ..आपके ये शब्द मेरा मनोबल बढाते हैं ..मुझे रचना धर्मिता की नयी उर्जा प्रदान करते हैं ..भविष्य में भी आपकी प्रतिक्रियाओं मुझे मिलती रहेगी इसी कामना के साथ ..सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 1:53pm

आदरणीय नरेन्द्र जी ..रचना पर आपकी प्रतिक्रिया के लिये हार्दिक आभार ..सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 1:23pm

आदरणीय जीतेन्द्र जी ..आपकी स्नेहिल शब्दों के लिए लिए तहे दिल शुक्रिया ..सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 1:20pm

आदरनीय अभिनव जी ..उत्साहवर्धक आपकी इस प्रतिक्रिया के लिए  तहे दिल धन्यवाद ..सादर प्रणाम के साथ 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे -रिश्ता
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी रिश्तों पर आधारित आपकी दोहावली बहुत सुंदर और सार्थक बन पड़ी है ।हार्दिक बधाई…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"तू ही वो वज़ह है (लघुकथा): "हैलो, अस्सलामुअलैकुम। ई़द मुबारक़। कैसी रही ई़द?" बड़े ने…"
Monday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"गोष्ठी का आग़ाज़ बेहतरीन मार्मिक लघुकथा से करने हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह…"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आपका हार्दिक आभार भाई लक्ष्मण धामी जी।"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"ध्वनि लोग उसे  पूजते।चढ़ावे लाते।वह बस आशीष देता।चढ़ावे स्पर्श कर  इशारे करता।जींस,असबाब…"
Sunday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"स्वागतम"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
Saturday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service