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Maheshwari Kaneri
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Maheshwari Kaneri commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post जागो उठो हे लाल तुम (मधुमालती छंद)
"भाई सुरेन्द्र नाथ जी आहूत सुन्दर रचना हुई है बशाई और शुभकामना "
Friday
Maheshwari Kaneri posted a blog post

मातृ भूमि के लिए ..

मनहरण धनाक्षरी  ..तन मन प्राण वारूँ वंदन नमन करूँ गाऊँ यशोगान सदा   मातृ भूमि के लिए ..पावन मातृ भूमि ये, वीरों और शहीदों  की जन्मे राम कृष्ण यहाँ हाथ सुचक्र लिए ,ये बेमिसाल देश है संस्कृति भी विशेष हैपूजते पत्थर यहाँ  आस्था अनंत लिए शौर्य और त्याग की  भक्ति और भाव कीकर्म पथ चले सभी हाथ में ध्वजा  लिए ......अप्रकाशित /मौलिक महेश्वरी कनेरी See More
Friday
Maheshwari Kaneri commented on Maheshwari Kaneri's blog post मातृ भूमि के लिए ..
"आदरणीय समर कवीर जी ..आप का बहुत बहुत आभार ,,,"
Friday
Maheshwari Kaneri commented on Maheshwari Kaneri's blog post मातृ भूमि के लिए ..
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी ..त्रुटियाँबताने के लिए आप का बहुत बहुत धन्यवाद ..सुधार करुँगी "
Friday
Samar kabeer commented on Maheshwari Kaneri's blog post मातृ भूमि के लिए ..
"मुहतरमा महेश्वरी कनेरी जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें । जनाब महेन्द्र जी टंकण त्रुटियों के बारे में बता चुके हैं ।"
Friday
Mahendra Kumar commented on Maheshwari Kaneri's blog post मातृ भूमि के लिए ..
"बढ़िया लगी आपकी रचना आदरणीया माहेश्वरी कनेरी जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए.  कुछ टंकण त्रुटियाँ हैं : 1. //पावन मातृ भूमि ये, वीरों और शहीदों की// 2. //ये बेमिसाल देश है संस्कृति भी विशेष है// देख लीजिएगा. सादर."
Thursday
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मातृ भूमि के लिए ..

मनहरण धनाक्षरी  ..तन मन प्राण वारूँ वंदन नमन करूँ गाऊँ यशोगान सदा   मातृ भूमि के लिए ..पावन मातृ भूमि ये, वीरों और शहीदों  की जन्मे राम कृष्ण यहाँ हाथ सुचक्र लिए ,ये बेमिसाल देश है संस्कृति भी विशेष हैपूजते पत्थर यहाँ  आस्था अनंत लिए शौर्य और त्याग की  भक्ति और भाव कीकर्म पथ चले सभी हाथ में ध्वजा  लिए ......अप्रकाशित /मौलिक महेश्वरी कनेरी See More
Thursday
Neelam Upadhyaya commented on Maheshwari Kaneri's blog post आग नई फिर बुन लो ना ( गीत)
"आदरणीया माहेश्वरी कनेरी जी, नमस्कार । बहुत ही सुंदर रचना की प्रस्तुति । बधाई स्वीकार करें ।"
May 10, 2018
Maheshwari Kaneri posted blog posts
May 10, 2018
Mohammed Arif commented on Maheshwari Kaneri's blog post आग नई फिर बुन लो ना ( गीत)
"आदरणीया माहेश्वरी कनेरी जी आदाब,                              बहुत ही सुंदर गीत लिखा है आपने । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब के सुझावों और सुधारों पर तत्काल प्रभाव से संज्ञान…"
May 10, 2018

Profile Information

Gender
Female
City State
Dehra Dun Uttarakhand
Native Place
Dehara Dun
Profession
Reitaird Teacher
About me
Writing is my hobby

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मातृ भूमि के लिए ..

मनहरण धनाक्षरी  ..

तन मन प्राण वारूँ वंदन नमन करूँ 

गाऊँ यशोगान सदा   मातृ भूमि के लिए ..

पावन मातृ भूमि ये, वीरों और शहीदों  की 

जन्मे राम कृष्ण यहाँ हाथ सुचक्र लिए ,

ये बेमिसाल देश है संस्कृति भी विशेष है

पूजते पत्थर यहाँ  आस्था अनंत लिए 

शौर्य और त्याग की  भक्ति और भाव की

कर्म पथ चले सभी हाथ में ध्वजा  लिए .....

.

अप्रकाशित /मौलिक 

महेश्वरी कनेरी 

Posted on January 16, 2019 at 5:00pm — 4 Comments

आग नई फिर बुन लो ना ( गीत)

क्यों बुझे बुझे से बैठे हो ,

आग नई फिर बुन लो ना |

भटक गए गर राह कहीं तुम ,

राह नई फिर चुन लो ना |

बुझे बुझे से ...........

दुःख सुख तो हैं आते जाते  ,

बात सभी हैं ये ही कहते …

Continue

Posted on May 9, 2018 at 1:30pm — 6 Comments

दो नन्हें फूल

दो नन्हें फूल,मेरे आँगन के

खिलते महकते,खुशियाँ जीवन के

लड़ते झगड़ते, कभी रुठ भी जाते

पल भर में फिर भूल भी जाते

भोली हँसी कोमल इनका मन है

इनकी बातो में झरते सुमन हैं

दुख का साया, इनके पास न आए

निर्मल धारा ये, बस बहते ही जाए

‘काशवी’ जीवन है तो,’दैविक’ वर है

इनसे ही तो बना ,मेरा घर , घर है

          ***********

काशवी’-प्रकाशवान

दैविक- ईश्वर का दिया वरदान

       …

Continue

Posted on January 5, 2015 at 8:30pm — 7 Comments

माँ के माथे की बिन्दी

माँ के माथे की बिन्दी

गोल बड़ी सी बिन्दी

माथे पर कान्ति बन

खिलती है बिन्दी

माँ के माथे की बिन्दी

सजाती सवाँरती

पहचान बनाती बिन्दी

मान सम्मान

आस्था है बिन्दी

शीतल सहज सरल

कुछ कहती सी बिन्दी

माँ के माथे की बिन्दी

थकान मिटा,उर्जा बन

 मुस्काती बिन्दी

पावन पवित्र सतित्व की

 साक्षी है बिन्दी

परंपरा संस्कारों का

आधार है बिन्दी

माँ के माथे की बिन्दी

अपनी हिन्दी भी…

Continue

Posted on September 12, 2014 at 6:30pm — 5 Comments

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At 8:44pm on March 11, 2014, Omprakash Kshatriya said…

कविता में मनोभावों की सुन्दर अभिव्यक्ति हुई है . बधाई .

At 10:34pm on January 1, 2014, annapurna bajpai said…

स्वागत आपका ।

 
 
 

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