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किसी की याद रातो मे हमें सोने नहीं देती
कसम उसने दिया था जो हमे रोने नहीं देती
चली थी साथ मेरे जो कभी इक हमसफर बन कर
न जाने पास अपने क्यों हमें होने नहीं देती
सिखाया था हमें जिसने जमाने में रहें कैसे
वही अब प्यार भी हमको वहाँ बोने नहीं देती
नहीं है प्यार मुझसे अब मगर नफरत जरा देखो
किसी को लाश भी मेरी वो अब ढोने नहीं देती
हमारे गीत में छुपकर हमेशा जो चली आती
बने आवाज दिल की वो हमें खोने नही़ं देती
मौलिक एवं अप्रकाशित
अखंड गहमरी गहमर गाजीपुर
Comment
न जाने क्यो हमें वह प्यार अब बोने नहीं देती
उत्सावर्धन एवं मार्गदर्शन के लिये आपको चरण स्पर्श आप का आशीवाद बना रहें आदरणीया coontee mukerji जी
सिखाया था हमें जिसने जमाने में रहें कैसे
वही अब प्यार भी हमको वहाँ बोने नहीं देती..........बहुत सुंदर
उत्सावर्धन एवं मार्गदर्शन के लिये आपको चरण स्पर्श आप का आशीवाद बना रहें आदरणीय डाक्ब्र गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी
गहमरी जी
बहुत सुन्दर i बधाई हो i
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