For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

भीषण गरमी का मौसम( अतुकांत)

भीषण गरमी के मौसम में

हम करते हैं आराम।

लेकिन जिन्दगी में,

कैसे करें आराम ।

काली काली जामुन

सावन से पहले की मीठी मीठी

हमने खायी,नहाते नहाते

क्या बिन बिजली हम जीते नहीं थे

अब सब बिजली के बिन चिल्लाते हैं

मजदूरों को कभी गरमी नहीं लगती

न वो बोलते हैं

अगर बोलें भी , तो कोई नहीं सुनता।।

मौलिक व अप्रकाशित।

Views: 438

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सूबे सिंह सुजान on July 29, 2014 at 10:24pm

बृजेश जी, धन्यवाद

Comment by सूबे सिंह सुजान on July 29, 2014 at 10:23pm

जवाहर जी, बिल्कुल, मजदूरों से मजदूरी करवा कर भी लोग मजदूरी देते वक्त हाथ भींचते हैं।

Comment by सूबे सिंह सुजान on July 29, 2014 at 10:22pm

Comment by सूबे सिंह सुजान on July 29, 2014 at 10:21pm
ganesh ji,आपका बहुत बहुत शुक्रिया। यह कविता बच्चों के वाक्यों पर लिखी गई वैसे ही जैसे उन्होंने बोली
Comment by बृजेश नीरज on June 30, 2014 at 11:38pm
अच्छा प्रयास। आपको बधाई।
हर रचना लिखे जाने के बाद भी कुछ समय चाहती है।
Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 29, 2014 at 9:50pm

क्या बिन बिजली हम जीते नहीं थे

अब सब बिजली के बिन चिल्लाते हैं

मजदूरों को कभी गरमी नहीं लगती

न वो बोलते हैं

अगर बोलें भी , तो कोई नहीं सुनता।।

इन पर कौन ध्यान देगा? बिजली के टावर पर चढ़कर काम करनेवालों मजदूरों के घरों में भी बिज्ली नहीं होती 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 29, 2014 at 8:18pm

//भीषण गरमी के मौसम में

हम करते हैं आराम।

लेकिन जिन्दगी में,

कैसे करें आराम ।//   हम करते हैं आराम, जिंदगी में कैसे करे आराम, यह उलझा रहा है आदरणीय, बात स्पष्ट नहीं हुई। अंतिम स्टेन्जा प्रभावित करता है,  अतुकांत पर बढ़िया प्रयास है, बधाई। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
26 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
1 hour ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
2 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक जी सादर अभिवादन  बहुत बहुत धन्यवाद आपका  बहुत अच्छे सुझाव हैं ग़ज़लमें निखार…"
2 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय रिचा यादव जी, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई स्वीकार करें।"
5 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, अति सुंदर ग़जल के लिए बधाई स्वीकार करें।"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई तिलकराज जी, सादर अभिवादन।गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार। बहुत सुंदर सुझाव दिया…"
5 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय रिचा यादव जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
5 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. रिचा जी, हार्दिक धन्यवाद।"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई अजय जी, गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
5 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, सुंदर ग़जल के लिए बधाई स्वीकार करें।"
5 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service