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तेरे बिन अपना हाल ....सखी री तुझे क्या बतलाऊं
गुल बिन ज्यों गुलदस्ता है
भूले को ज्यों इक रस्ता है
कॉपी बिन ज्यों इक बस्ता है
और दाल बिना ज्यों खस्ता है
वसंत...बिना इक साल ......सखी री तुझे क्या बतलाऊं


माँ बिन .. जैसे लोरी है
भ्रात बिना वो डोरी ..सखी
चोर बिना ..ज्यों चोरी है
पनघट है बिन गोरी..सखी
राधा बिन ज्यों गोपाल.......सखी री तुझे क्या बतलाऊं


ज्यों अंगना है बिन नोनी के         

ब्रिटेन   है..... बिन टोनी के

क्रिकेट है ......बिन धोनी के
और बनियां है बिन बोनी के
नानी बिन ज्यों ननिहाल ....सखी री तुझे क्या बतलाऊं


स्तम्भ बिना महरौली है
मंत्र बिना ज्यों मौली है
जैसे रंग बिना रंगोली है
प्रतिष्ठान बिना ज्यों रोली है.....
साली...बिन ज्यों ससुराल......सखी री तुझे क्या बतलाऊं
साङी है जैसे बिन पल्ला के
ताश है ज्यों बिन गुल्ला के
और...पानी बिन जैसे कुल्ला है.
कुरान बिना... ज्यों मुल्ला है
बिन ताल ज्यों नैनीताल......सखी री तुझे क्या बतलाऊं


शादी बिन जैसे ढोल सखी
सङक बिना ज्यों टोल सखी
फुटबाल बिना ज्यों गोल सखी
वाचाल है ज्यों बिन बोल सखी
उत्तर....बिना सवाल ......सखी री तुझे क्या बतलाऊं

इतिहास बिना ज्यों जजिया है
दिल्ली बिन जैसे रजिया है
वेसन बिन ज्यों भजिया है
और दही बिना जैसे गुजिया है
मनवसिया बिन अपना हाल.....सखी री तुझे क्या बतलाऊं

.

@anand

"मौलिक व अप्रकाशित

Views: 215

Comment

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Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 29, 2014 at 10:56pm

सखा रे तुझे क्या बतलाऊं :) बहुत अच्छी लगी आपकी रचना . हार्दिक बधाई आपको आदरणीय आनंद जी

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 28, 2014 at 1:04pm

खूब तुक मिलाया भाई i ऐसे ही डटे  रहो i सस्नेह i

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