For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Anand murthy's Blog (16)

दिये के आले....

दीवारों में
दिये के आले
दीपक का स्वागत करते हैं
रश्मि राग में
मगन हुई
ज्योति
पताका लहराती है
तमस वज्र को तोड़
आलय को रोशनी से भर देते हैं
और
दिये के आले
बदले में
दिये से
काजल के झाले
खुद अन्तस में
धर लेते हैं
@आनन्द 18/04/2015 "मौलिक व अप्रकाशित"

Added by anand murthy on April 18, 2015 at 1:28pm — 4 Comments

रुख़सती पे उनकी...............

रुख़सती पे उनकी आँखों में नमी अच्छी लगी

ज्यूं दूर बादलों को धरा की गमी अच्छी लगी

तबस्सुम देख के मचली लबों पे एक दूसरे के

पाक इरादों में छिपी उनकी कमी अच्छी लगी

असीम…

Continue

Added by anand murthy on March 15, 2015 at 11:30am — 7 Comments

होली आई होली आई.....

मधुशाले भी बोल रहे.... होली आई होली आई

भंग घुटेगी रस गन्ने में होली आई होली आई

है सरकारी फ़रमान ....

प्यारे बन्द रहेगी दुकान

साकी अकेली प्याले अकेले

हथ जोड़ करें आह्वान

आजा ..आ जाओ श्रीमान 

बोतल... अद्दी पउआ ले जा

रम भिस्की ए दउआ ले जा

भर लो... सारो मकान

ओ बन्द रहेगी दुकान

मयखाने भी बोल रहे होली आई होली आई

रंग घुलेंगे दंग रहेंगे होली आई होली आई

इक दिन पहले प्यारे ले जा

ज़ाम जहां के न्यारे ले जा

बम भोले का प्रसाद…

Continue

Added by anand murthy on March 5, 2015 at 10:08pm — 3 Comments

दिल से दिल के तार................................

दिल से दिल के तार जुड़े संतूर जहाँ में बजते हैं

छंद पहेली गीत ग़ज़ल जब दूर जहाँ में सजते हैं

रुनझुन-रुनझुन घुंघरू आहट  का संदेशा लाती है

ताल मिलाती धड़कन से मगरूर जहाँ में लगते है

अंतस मन मेल हुआ दिलबाग रूमानी गुलशन है  

रुखसार गुलाबी होंठ शबाबी नूर जहाँ में लगते हैं

हया लबों पे खेल रही है नज़र नज़ाकत शानी है

कोयल किस्से कहती है मशहूर जहाँ में लगते हैं

नैन नख्श नखरों पे है नायाब नवेली नज्म अदा

फिदा फ़साने पर आनंद वो चूर जहाँ में लगते…

Continue

Added by anand murthy on February 14, 2015 at 2:59pm — 8 Comments

कब तक मनाऊँ मैं...............

कब तक मनाऊँ मैं, वो अक्सर रूठ जाते हैं|

गर्दिश में अक्सर.... हर सहारे छूट जाते हैं|1



न मनाने का सलीका है,न रिझाने का तरीका है|

मनाते ही मनाते वो      अक्सर रूठ जाते है|2



संजोकर दिल में रखता हूँ,नजर को खूब पढ़ता हूँ|

मगर खास होते ही   ,अक्सर नजारे छूट जाते हैं|3



आयना समझकर हम.., उन्ही को देख जाते हैं|

संभालने की ही कोशिश में,जो अक्सर टूट जाते…

Continue

Added by anand murthy on February 8, 2015 at 9:20pm — 8 Comments

विकट विरल है राह .................

विकट विरल है  राह  कठिन कदम कदम कुहासा है

खड़ा मुसाफिर मुश्किल में वो बेबस बहुत रूआंसा है

संयम और सहजता से निरंतर नित निज काम करो

शनै शनै पुरजोर प्रयासों से प्रज्ज्वलित इक आशा है

संकल्पों के यज्ञकुंड में श्रमनीर का  अर्घ्य दान करो

दिनकर दिलबर रश्क करे जिन्दगी की यह परिभाषा है

अरमानों के बीज रोप कर  सींचो  रोज  पसीने से

छ्टे कुहासे साफ़ डगर स्फुटन अंकुर की अभिलाषा है

@आनंद ०७/०१/२०१५ "मौलिक व…

Continue

Added by anand murthy on January 24, 2015 at 1:30pm — 9 Comments

बाती मैं ....

दिये की बाती मैं

धुए में घिर जाती हूं

कुछ पल को घबराती

तो कुछ पल इठलाती हूँ

चीर तिमिर की छाती मैं

भू को ज्योतिर्मय कर जाती हूँ

अनिल तूफानी तेज हुए

भावुक मन और उत्तेजित हुए

ज्योति शिखर पे नर्तन करती

लिपट दिये के अंतस में

क्षण भर को शर्माती

और सहज धीर बढ़ाती हूँ

राग अनोखे गाती मैं

रागिनी को अपना पाती हूँ

आह समेटे... चाह लिए

क्षणभंगुर आतुर जीवन में

खाक हुई... पीर छिपाई

ज़र्रे ज़र्रे को रोशन करती

अपलक रास रचाती…

Continue

Added by anand murthy on January 13, 2015 at 8:45pm — 9 Comments

होगा सबको हर्ष.....

होगा सबको  हर्ष

जब होगा नव वर्ष

होगा सवेरा नवीन

संध्या होगी नवीन

दिवस  भी नया

होगी रजनी नई

गगन  भी नया

निर्मल सरिता नई

हिमांशु  नवीन  

रवि होगा नवीन

मुस्कुराए  वरुण  

रश्मि होगी अरुण

वे उर्मिल  किरण

करें आकांक्षी वरण

कोई हो न संकीर्ण  

होवें  पूर्ण  प्रवीण

आलोकित हो ......

खुशियों  की उमंग

रहे  बजता  मृदंग

बूढ़े बच्चे सब संग

झूमें खेलें नव रंग...

न…

Continue

Added by anand murthy on January 4, 2015 at 12:30pm — 8 Comments

पूजा का वो थाल लगी

साड़ी में जैसे फाल लगी

डाली में जैसे डाल लगी

 

मैं भी कुछ खिल जाउंगा

वो आके जब गाल लगी

 

धीरे से पाती खोल रहीं

तबले पे जैसे ताल लगी

 

नज़रों की  चोली ओढ़ेगी

मालों में  जो माल लगी

 

असीर हैं  अनचाहे हम  

मछली का वो जाल लगी

  

इत्र गुलाबी  खुशबू फैली

पूजा का वो थाल लगी

 

अजब सलीके कत्ल किया

चैन की वो ही काल  लगी

 

गाली भी  खिल जाएगी

मुखड़े से जब…

Continue

Added by anand murthy on November 1, 2014 at 1:30pm — 5 Comments

उत्तर जहां से अब ..

हाय राम क्या करे जी कोई ...जवाब चाहिए

उत्तर जहां से अब तो कुछ लाजवाब चाहिए

लौकी आलू भिण्डी टमाटर लड़ते  हैं  बाजार में

इस दिवाली  हमको  ही इक खिताब चाहिए

पटाखों फुलझड़ी को देख बच्चे मचल रहे हैं

टूटी आस लिए वो पूछें कितने बेताब चाहिए

मजबूरियों में निःशब्द बाप आंसू बहा रहे हैं

फीकी जेब तेज हाट में माथों पर आब चाहिए

लड्डू बर्फ़ी रसगुल्ला हमसे यूँ  अब दूर हुए

मिश्री घोलें रिश्तों में मिठास बेहिसाब…

Continue

Added by anand murthy on October 21, 2014 at 5:00pm — No Comments

घर मेरे सावन का..............................

आज मौसम   ....बड़ा आशिकाना है

शब्द के मोतियों से  उन्हें सजाना है

 

हर्फ़ में ही सही  तस्वीर बनाई बहुत

कहीं और    जिनका अब ठिकाना है

 

जिसकी खातिर यहाँ रातें बिताई बहुत

उनका इधर से यूँ रोज आना जाना है

 

ख्वाब में डाल पर झूले झूलेंगे हम

घर मेरे सावन का यूँ आना जाना है

 

स्वप्न में आकर फ़िर से लुभाओ प्रिय

जहाँ  न मेरा न तेरा कोई  बहाना है

 

कैसे कह दूँ उन्हें प्यार करता नहीं

पहले दीदार…

Continue

Added by anand murthy on October 11, 2014 at 11:58pm — 3 Comments

चुटकियों से माँ...................

एक छतरी है जो याद मुझको बहुत आती है|

चुनरी पालने की याद मुझको रोज आती है |।

 

सुधियों से परिपूर्ण,सुध बचपन की आती है |

अंगने के झूले की,याद उस उपवन की आती है|।

 

सायबान की छाया में ..पालने की गोदी में.......

हरकतों पर मेरी दूर खड़ी माँ खूब  मुस्कुराती है।।

 

चुटकियों से माँ, मेरे चेहरे पर सरगम सजाती है |

डूबकर मेरी किलकारियों में ,हर गम भूल जाती है|।

 

माँ मुझे पालना झुलाती है ,कभी गोदी में हिलाती है…

Continue

Added by anand murthy on October 8, 2014 at 4:30pm — 4 Comments

लो अब मैं ....

लो अब मैं सुधर गया

उनके दिल से उतर गया

याद न आया उनको मैं भी

मेरी कुरबत भी न भा पाई

उनकी सुधियों से गुजर गया

इक पतझड़ सा बिखर गया

मलूल हुआ आनन्द

सोचकर कि वो

इजहारे-वक्त पर मुकर गया

उसूल देखो यार मेरे

साए में…

Continue

Added by anand murthy on September 29, 2014 at 7:30pm — 4 Comments

तेरे बिन ..........

तेरे बिन अपना हाल ....सखी री तुझे क्या बतलाऊं

गुल बिन ज्यों गुलदस्ता है

भूले को ज्यों इक रस्ता है

कॉपी बिन ज्यों इक बस्ता है

और दाल बिना ज्यों खस्ता है

वसंत...बिना इक साल ......सखी री तुझे क्या बतलाऊं



माँ बिन .. जैसे लोरी है

भ्रात बिना वो डोरी ..सखी

चोर बिना ..ज्यों चोरी है

पनघट है बिन गोरी..सखी

राधा बिन ज्यों गोपाल.......सखी री तुझे क्या बतलाऊं



ज्यों अंगना है बिन नोनी के         

ब्रिटेन   है..... बिन टोनी…

Continue

Added by anand murthy on September 27, 2014 at 12:00pm — 2 Comments

काशी की दुनिया.........

काशी की दुनिया हो

या काबा की बस्ती हो

यूँ ही न उजड़े चाहे

फ़कीर बाबा की बस्ती हो।।

साहिल से बिछड़ी हुई

मुक़ाम-ए-पास हो जाए

लहरों में फँसती चाहे

केवट की कश्ती हो।।

शोहरत की मस्ती हो

या माले की हस्ती हो

यूँ ही न टूटे कोई चाहे

मुफ़लिसी में घरबां गिरस्ती हो।।

मातहतों की मस्ती…

Continue

Added by anand murthy on September 11, 2014 at 4:00pm — 8 Comments

मैंने भी तेज नजरो को...

बन के अजनबी वो अक्सर मेरे दर से गुजरते हैं

फ़कत दीदार को खुद को रस्तों से जोड़ रक्खा हैं

दिल की दरियादिली दर्पण-सी सच्ची देखकर

घर के आईनों में तेरी तस्वीर को जोड़ रक्खा हैं

हकीकत की सतह से उस चाँद को देख रक्खा है..

खुदा के उस हसीं अजूबे से नाता जोड़ रक्खा है

कहने को तो उन्होने बहुत कुछ छोड़ रक्खा है...

चाहत की चिट्ठी को लिफाफों में मोड़ रक्खा है..

हवाओं के सहारे खुशबू कुछ इस तरफ़ आयी....

मैंने भी तेज नजरो…

Continue

Added by anand murthy on September 8, 2014 at 6:00pm — 2 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

विनय कुमार posted a blog post

पुरानी पहचान-लघुकथा

"अरे, उस भलेमानस के पास जाना है, चलिए मैं ले चलता हूँ", सामने वाले व्यक्ति ने जब उससे यह कहा तो उसे…See More
31 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post प्रतीक्षा लौ ...
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन और भावपूर्ण रचना पर बधाई स्वीकार कीजिये"
3 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post लड़की (लघुकथा)
"आद0 शेख शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन।बढ़िया लघुकथा लिखी आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
3 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on रामबली गुप्ता's blog post गरीबी न दे ऐ खुदा जिंदगी में-रामबली गुप्ता
"आद0 रामबली जी सादर अभिवादन। वाह क्या बेहतरीन छंद लिखा है बन्धु, बहुत बढ़िया। विषय भी दिल को छूता…"
3 hours ago
amod shrivastav (bindouri) replied to Tilak Raj Kapoor's discussion ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-4 in the group ग़ज़ल की कक्षा
"आ तिलक राज साहब, आ समर साहब, आ विनस भाई साहब  प्रणाम  सर मुझे काफ़िया को लेकर जानकारी…"
7 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

महाभुजंगप्रयात छंद में पहली रचना

नहीं वक़्त है ज़िन्दगी में किसी की, सदा भागते ही कटे जिन्दगानीकभी डाल पे तो कभी आसमां में, परिंदों…See More
10 hours ago
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

नफ़स की धुन नही थमीं...

परिवार :- हजज़ मुरब्बा मक़बूज अरकान :-  मुफाइलुन मुफाइलुन (1212-1212)मुझे  उसी  से प्यार हो ।।…See More
10 hours ago
दिगंबर नासवा commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"अच्छी ग़ज़ल हुई है मनोज जी ... "
22 hours ago
दिगंबर नासवा commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नास्वा - 4
"बहुत आभार है लक्ष्मण जी ..."
22 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अधूरी सी ज़िंदगी ....
"आदरणीय  narendrasinh chauhan जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post प्रतीक्षा लौ ...
"आदरणीय  narendrasinh chauhan जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post प्रतीक्षा लौ ...
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब , ... सृजन के भावों आत्मीय प्रशंसा से अलंकृत करने का दिल से आभार।"
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service