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हो कितनी स्वछन्द ऐ कविता! (नवगीत 'राज')

धरती से नीले अम्बर तक

बिना किसी व्यवधान

इठलाती तितली सी चंचल

भरती रहे  उड़ान 

ना कोई सीमा ना कोई बंद

हो कितनी स्वछन्द

ऐ कविता!

कभी करुण रस से आप्लावित   

भीगे आखर से बोझिल   

कभी डूब शिंगार झील में

आती नख- शिख तक झिलमिल  

कभी गरल तू विरह का  पीती  

कभी नेह  मकरंद

हो कितनी स्वछन्द

ऐ कविता!

कभी परों पर लगा बसंती

रंग अबीर गुलाबी लाल

कहीं बिठाती दीये  पंगति

पहन हास प्रहास की माल

जीती कभी रौद्र के पलछिन

 कभी धर्म के द्वन्द

 हो कितनी स्वछन्द

 ऐ कविता!

 

विभत्स, अमेध्य लोक पंक की

हो तुम्ही शुचि निज पंकजा

मूर्त, अमूर्त, वारि से थल तक

फहराती अपनी ध्वजा

मेरी इन साँसों की मीता

ग़ज़ल तुम्ही हो छंद

हो कितनी स्वछन्द

ऐ कविता!

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 12, 2014 at 6:49pm

आ० विजय निकोर जी, आप जैसे संवेदन शील रचनाकार से तारीफ पाने से रचना खुद धन्य हो जाती है बहुत बहुत आभार आपका सादर .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 12, 2014 at 6:47pm

आ० मीना पाठक जी ,उत्साहित करती आपकी प्रतिक्रिया सर आँखों पर |

Comment by vijay nikore on October 12, 2014 at 12:52pm

अति सुन्दर भाव। "कविता" पर यह कविता बहुत ही अच्छी लगी। हार्दिक बधाई, आदरणीया राजेश जी।

Comment by Meena Pathak on October 12, 2014 at 12:03pm

बहुत बहुत सुन्दर ..अद्भुत रचना ..हार्दिक बधाई आदरणीया राजेश जी | सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 12, 2014 at 11:00am

प्रिय जितेन्द्र गीत भैया,नवगीत पर आपकी प्रतिक्रिया से उत्साह वर्धन हुआ ,दिल से आभारी हूँ | 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 12, 2014 at 10:25am

इस अद्भुत प्रस्तुति पर आपकी अनुभवी लेखनी को नमन, आदरणीया राजेश दीदी. अति सुंदर लिखा है आपने


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 10, 2014 at 8:21pm

आ० डॉ० गोपाल नारायण जी आपकी प्रतिक्रिया मेरा पारितोषिक है ,मेरी लेखनी को नव ऊर्जा देता हुआ आपका अनुमोदन सर माथे पर दिल से बहुत- बहुत आभार आपका  सादर |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 10, 2014 at 8:18pm

आ० डॉ० आशुतोष मिश्रा जी ,इसउत्साह वर्धन करती प्रतिक्रिया  के लिए अभिभूत हूँ मेरी लेखनी को नव ऊर्जा मिली दिल से आभारी हूँ |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 10, 2014 at 8:16pm

सोमेश कौर जी ,आपका दिल से आभार |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 10, 2014 at 8:16pm

आ० डॉ.विजय शंकर जी ,आपका हार्दिक आभार | 

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