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झगड़ा ना हो सुलह बनों।
ऐसी कोई वजह बनों।।

चर्चा हो सारे जग में।
ऐसी भी इक जगह बनों।।

तारीफ भी करना खूब।
पहले उसकी तरह बनों।

बेगुनाह को सजा न हो।
ऐसी कोई ज़िरह बनों।।

वाह वाह होगी तेरी।
पहले ऐसी गिरह बनों।।

-राम शिरोमणि पाठक
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by ram shiromani pathak on November 25, 2014 at 12:59am
आभार आदरणीय गोपाल जी।।सादर
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 24, 2014 at 7:41pm

छोटी बह्र पर  अच्छी गजल

Comment by ram shiromani pathak on November 24, 2014 at 10:19am
आभार आदरणीय विजय निकोर जी।।सादर
Comment by vijay nikore on November 24, 2014 at 9:11am

गज़ल अच्छी लगी। बधाई।

Comment by ram shiromani pathak on November 23, 2014 at 4:57pm
उत्साह वर्धन हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीय गणेश जी।।सादर

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 23, 2014 at 4:46pm

इसे कहते हैं छोटी बहर में बड़ी बात, खूबसूरत ख्यालात से पगी इस खूबसूरत ग़ज़ल पर ढेरों बधाईयां राम भाई, बहुत सुंदर ग़ज़ल .

Comment by ram shiromani pathak on November 23, 2014 at 9:23am
सोमेश भाई हार्दिक आभार आपका।।सादर
Comment by somesh kumar on November 22, 2014 at 8:30pm

समाज में अपने कर्मों और  व्यक्तित्व के बल पे सबके लिए स्वीकार्यता इस रचना का संदेश है जो एक स्वस्थ एवं सुखी समाज के लिए अनिवार्य है ,सुंदर भाव-पल्लवन के लिए बधाई 

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