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बुद्ध हो गये क्या

बुद्ध हो गये क्या?
शुद्ध हो गये क्या?

मज़ाक मज़ाक में!
क्रुद्ध हो गये क्या?

उसको देख देख!
मुग्ध हो गये क्या?

सफेदी दिखी है!
दुग्ध हो गये क्या?

अपनों के पथ में!
रुद्ध हो गये क्या?
**************
-राम शिरोमणि पाठक
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by ram shiromani pathak on December 3, 2014 at 12:11am
Adarneey giriraj Ji utsaah vardhan hetu bahut aabhar Apka///sadar

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 2, 2014 at 9:57pm

आदरणीय राम भाई , छोटी बहर मे कमाल की गज़ल कही । हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by ram shiromani pathak on December 2, 2014 at 1:29pm

मेरा प्रयास आपको सुन्दर लगा मेरे लिए यही तोषकारी है//सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on December 2, 2014 at 1:07pm

 सुन्दर प्रयास ,हार्दिक बधाई राम शिरोमणि पाठक जी !

Comment by ram shiromani pathak on December 2, 2014 at 9:21am
आदरणीय शरदिंदु जी अमूल्य सुझाव हेतु आभार आपका।।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on December 2, 2014 at 2:37am
भाई राम शिरोमणि जी, अच्छी लगी आपकी रचना. अंतिम दो पंक्तियाँ विशेष रूप से प्रभावित करती हैं. मुझे आदरणीय डॉ गोपाल नारायन जी का सुझाव समीचीन लगा....आपको??
Comment by ram shiromani pathak on December 1, 2014 at 3:29pm
आदरणीय गोपाल नारायण जी आभार आपका।।सादर
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 1, 2014 at 11:01am

वाह ---इस छोटी  बह्र पर

इस तरह से लिखा

प्रबुद्ध हो गए क्या  ? --------क्या में प्रश्नवाचक चिन्ह भी अपेक्षित है i

Comment by ram shiromani pathak on December 1, 2014 at 10:02am
भाई सोमेश जी बहुत आभर
Comment by ram shiromani pathak on December 1, 2014 at 10:02am
आदरणीय जवाहरलाल जी बहुत आभार।।सादर

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