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ग़ज़ल ,,,,,,,,,,,, गुमनाम पिथौरागढ़ी

२२२१

ये अखबार

सच बीमार

कैसा धर्म

गो,तलवार

सच की राह

है दुश्वार

मरघट देगा

रिश्तेदार

आ ऐ मौत

कर उद्धार

जग गुमनाम

किसका यार

मौलिक व अप्रकाशित

आपकी समालोचना की प्रतीक्षा है

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 11, 2015 at 3:18pm

छोटी बह्र 

जादू यार 

सुन्दर प्रस्तुति, बधाई जनाब गुमनाम जी.

Comment by somesh kumar on January 11, 2015 at 2:55pm

ये अखबार

सच बीमार-सरकारी कृपा पर आश्रित मिडिया क्या दिखाए 

कैसा धर्म

गो,तलवार-लोग भूखे मरे ,तरह-तरह की समस्याएँ पर धर्म को वे ऐसे ही परिभाषित करेंगे 

सच की राह

है दुश्वार-ये राह ही कंटक भरी है 

मरघट देगा

रिश्तेदार- अधिकांश रिश्ते बस विशेष अवसरों पर दिखते हैं ,मरघट तक आना भी बड़ी बात है 

आ ऐ मौत

कर उद्धार- बहुत से लाचार और अनाथ जन यही कामना कर रहे हैं 

जग गुमनाम

किसका यार-यही सच है 

सुंदर कोशिश 

मौलिक व अप्रकाशित

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"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
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