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‘दो टिकट बछरावां के लिए’ –मैंने सौ का नोट देते हुए बस कंडक्टर से कहा I

‘टूटे दीजिये, मेरे पास चेंज नहीं है I’

‘कितने दूं ?’

‘बीस रुपये ‘

   मैंने उसे बीस रूपए दे दिये और पर्स सँभालने में व्यस्त हो गया I वह रुपये लेकर आगे बढ़ गया I

-'क्या कंडक्टर ने टिकट दिया ?'- सहसा मैंने पत्नी से पूछा i

‘नहीं तो ‘ उसने चौंक कर कहा I  तभी बगल की सीट पर बैठा एक अधेड़ बोल उठा –‘टिकट भूल जाइये साहेब , बछरावां के दो टिकट तीस रुपये के हुए उसने आपसे बीस ही तो लिए i दस का फायदा आपका और बीस का उसका I गौरमेंट की ऐसी-तैसी I’

 

(मौलिक व् अप्रकाशित )     

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Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on February 24, 2015 at 9:47am

बहुत ही बढ़िया विषय. सच! सरकार के कई विभागों में यही सब कुछ होता है. प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई आदरणीय डा.गोपाल जी.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 23, 2015 at 9:59pm

आदरणीय बड़े भाई गोपाल जी , गौरमेंट की ऐसी-तैसी  - ऐसी ही मानसिकता के कारण सच में पहले सरकार की फिर बाद में खुद की ऐसी तैसी हो रही है , जिसे आम तौर पर लोग समझ नहीं पाते ॥ बढिया विषय उठाया है आपने , बधाइयाँ ॥

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 23, 2015 at 7:22pm

आ० विनय कुमार जी

आपके कथन का स्वागत और आभार i  सादर i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 23, 2015 at 7:18pm

आ0 सत्य नारायन जी

सच् कहा आपने भ्रष्टाचार का यह भी रूप है  i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 23, 2015 at 7:16pm

खुर्शीद जी

सच्चाई है कि हम अपना आचरण नहीं देखते और नेता तथा सरकार की आलोचना  करते हैं i सादर i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 23, 2015 at 7:14pm

आ 0 हरि प्रकाश जी

अनुगृहीत  हुआ i सादर i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 23, 2015 at 7:13pm

प्रिय महर्षि त्रिपाठी

आपका बहुत बहुत आभार i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 23, 2015 at 7:12pm

आ० वामनकर जी

आपकी सटीक प्रतिक्रिया से अनुगृहीत हुआ i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 23, 2015 at 7:07pm

महनीया अर्चना तिवारी जी

आपकी प्रतिक्रिया का आभार i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 23, 2015 at 7:05pm

आ० शुभ्रांशु  पाण्डेय जी

आपने सच कहा करप्शन विद को-आपरेशन  i आपका आभार i

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