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यूं तो गुज़री हूँ बहुत बार खुद की नज़रों से..

हो न यूं अबकी जो गुजरूँ  तो गुज़र ही जाऊं  मैं..

आईने ने बहुत है साथ निभाया मेरा ..
कहीं जाऊं तो आइना ही ना  तोड़ जाऊं  मैं..

पल दो पल का साथ नहीं माएने रखता कोई..
साथ तुम हो तो शायद एक उम्र ही जी जाऊं  मैं..

है ज़रूरी बहुत एहसास का संग में होना..
क्या पता हो कुछ महसूस कुछ कर जाऊं मैं.. 

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Comment by Lata R.Ojha on March 25, 2011 at 9:20am
dhanyavaad Sanjay ji aur Ashish ji :)
Comment by आशीष यादव on March 25, 2011 at 1:34am
ek sundar rachna ke liye badhai.
Comment by Sanjay Sharma on March 25, 2011 at 1:06am

ये तो होना ही था ... 

हम संग थे पर एहेसास जगा ना सके

एहेसास आया भी तो कब, जब जमाने से गुजर गए

पर अब ना भुलाना ... अब ना नजरें छुड़ाना

मत भूलों कि मिलने का वादा  के गए थे

क्या पता वहाँ पर कुछ पल के लिए फिर से नजर मिल जाये 

Comment by Lata R.Ojha on March 24, 2011 at 11:15pm
dhanyavaad Tapan ji :)
Comment by Tapan Dubey on March 24, 2011 at 9:03pm
बहुत खूब लताजी

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