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“ बेटा!! अभी दो महीने पहले ही तेरी इकलौती जवान बहन का तलाक हुआ है. जैसे तैसे आस-पड़ोस वालो का मुंह बंद हुआ और तू गैर समाज की लड़की से चोरी छुपे शादी कर घर ले आया. तुझे अपने माता-पिता के मान-सम्मान का जरा भी ख्याल नहीं रहा..”

“ माँ! मैं पिछले चार-पांच साल से इस लड़की को प्यार करता हूँ, अब यह मेरे बच्चे की माँ बनने वाली है. अगर शादी नहीं करता तो बेवफ़ा कहलाता..”

      जितेन्द्र पस्टारिया

  (मौलिक व् अप्रकाशित)

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Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 3, 2015 at 1:37pm
आदरणीया अर्चना त्रिपाठी जी.आपकी उपस्थिति व् रचना की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार
सादर!
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 3, 2015 at 1:36pm
आदरणीय राजेन्द्र जी, आपका बहुत बहुत आभार
सादर!
Comment by Archana Tripathi on May 2, 2015 at 4:02pm
बहुत ही गैरजिम्मेदाराना तर्क एक पुत्र का अपनी माँ को।
बी
उत्तम रचना के लिए बधाई आपको
Comment by RAJENDER KUMAR GAUR on April 29, 2015 at 1:08pm

RIGHT WAY TO LIVE

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 10, 2015 at 7:35pm

आदरणीय डा.आशुतोष जी. लघुकथा पर आपकी प्रोत्साहन हेतु आपका बहुत-बहुत आभार

सादर!

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 4, 2015 at 1:49pm

आदरणीय जीतेन्द्र जी .. समाज के परिद्रश्य का जीवन उदाहरन ..हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 4, 2015 at 9:37am

आदरणीय गिरिराज जी, आदरणीय कृष्णा जी, आदरणीय मोहन जी. आप सभी की उपस्थिति व् सुझाव के लिए आभारी हूँ. यहाँ लघुकथा के माध्यम से यह सन्देश देने की कोशिश की है कि जो बेटा अपने माता-पिता और बहन के प्रति अपनी जिम्मेदारी नही समझ पाया वो अपनी प्रेमिका से भी वफ़ा नही कर पाया और उसे वफ़ा का नाम दे रहा है.

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 4, 2015 at 9:31am

आपका बहुत -बहुत आभार, आदरणीय श्याम मठपाल जी

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 4, 2015 at 9:30am

आपका बहुत-बहुत आभार ,आदरणीय श्याम नारायण जी

सादर!

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 3, 2015 at 4:18pm

आ: कृष्णा जी का सुझाव अच्छा लगा ....तो ये इशारा भी होगा की मान सम्मान स्त्री के सर ही मढ़ा जाता है गलती किसी की भी हो ......समाज की सोच भी ऐसी ही है ?...प्रस्तुति के लिये बधाई ....सादर 

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