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आरव ने खेल खेल में मेज पर प्लेट और गिलास से एक मीनार बना दी थी।""
"आरव बेटा यह क्या किया आपने"
आरव की मम्मा ने जिज्ञासावश आरव से पूछा।
"मम्मा मैंने यह अलार्म बनाया है ,अब जैसे ही भूकंप आयेगा हम जल्दी से घर से बाहर निकल जायेगे।कैसा है यह अलार्म मम्मा "
"बेटा जी अलार्म तो बहुत अच्छा है ।पर भगवान ना करें कि इसके बजने की नौबत आये"!

"मौलिक एवंम अप्रकाशित"

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Comment by neha agarwal on May 1, 2015 at 3:46pm
बागी सर जी यह तारिफ है या बुराई ,
मुझ कम बुद्धि को समझ नहीं आयी।।

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 28, 2015 at 11:21pm

इस आलार्म की चर्चा इधर व्हाट्स एप्स और फेस बुक पर खूब हुआ, उस चर्चा को ओ बी ओ पर लाने हेतु आभार.

Comment by neha agarwal on April 28, 2015 at 8:29pm
सादर धन्यवाद आदरणीय विजय जी
Comment by vijay nikore on April 28, 2015 at 4:18pm

 सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई।

Comment by neha agarwal on April 28, 2015 at 9:41am
सादर धन्यवाद आदरणीय मोहन सेठी जी
Comment by neha agarwal on April 28, 2015 at 9:40am
सादर धन्यवाद आदरणीय सौरभ जी
Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 28, 2015 at 7:29am

हर एक दिल में भूकंप ने भूकंप ला दिया है ......प्रभावी लघुकथा ....सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 27, 2015 at 11:48pm

परिघटनाओं से भावदशा सान्द्र हो तो रचनाएँ उभरती ही हैं .

शुभकामनाएँ ..

Comment by neha agarwal on April 27, 2015 at 8:34pm
धन्यवाद आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्री वास्तव जी
Comment by neha agarwal on April 27, 2015 at 8:31pm
धन्यवाद आदरणीय dr vijai shanker जी

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