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सात साल हो गये अत्याचार सहते सहते सोचा था कभी तो मनीष समझेगा उसे कभी तो उसके दिल मे उसके लिए प्यार जागेगा और कभी तो वो राधा को अपनी इस्तमाल की चीज़ के बजाय अपनी जीवन संगनी मानेगा!
पर नहीं अब भी वो वैसा ही था !!!! रोज़ दफ्तर से आकर वहाँ का गुस्सा राधा पर उतारना !आए दिन हर बात पे अपमानित करना गंदी गालियाँ देना !
पर आज तो हद ही हो गयी जब मनीष ने उसके चरित्र पर लांछन लगाया !
तडाक ****** एक ज़ोर का चाटा जडते हुए राधा ने उसका घर छोड़ने का एलान कर दिया।
राधा के जाने पर मनीष को एहसास हुआ आज उसने एक औरत के मान को ललकारा था ।
जिसका अपमान वो नहीं सह सकती।।।।।

मौलिक एवं अप्रकाशित रचना

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Comment by Priya mishra on May 8, 2015 at 12:37pm
धन्यवाद आदरणीय डाँ गोपाल नारायन जी
Comment by Priya mishra on May 8, 2015 at 12:35pm
धन्यवाद दीदी ।।।। नायिका ने सात साल अपने मान के लिए सहे पर जब उसके पति ने उस पर उंगली उठाई तो उसे अपने मान के लिए ही यह कदम उठाया ।।।Seema singh ji
Comment by Priya mishra on May 8, 2015 at 12:32pm
आपका बहुत आभार।।।।
पहली कोशिश थी आगे अपनी गलतियो को सुधारने की पूरी कोशिश करुगी ।।।धन्यवाद Saurabh pandey ji
Comment by Priya mishra on May 8, 2015 at 8:16am
धन्यवाद आदरणीयDr.vijai shanker ji
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 7, 2015 at 8:57pm

सात साल से पहले चरित्र पर उँगली नहीं उठी थी वरना यह कदम पहले भी  उठ सकता था  i अन्तिम् पंक्तियां  और मुखर हो सकती थी . सार्थक प्रयास.

Comment by Seema Singh on May 7, 2015 at 5:10pm
प्रिया जी मुझे आपका विषय पसंद आया मगर जो कदम नायिका राधा ने सात वर्ष प्रतीक्षा करने के बाद उठाया वो पहले ही क्यों नहीं ...

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 7, 2015 at 4:36pm

आदरणीया प्रिया मिश्राजी,

भारतीय पारम्परिक स्त्री का सिन्दूर ही उसके सतीत्व तथा उसके अस्तित्व की अक्षुण्णता का परिचायक है. इससे आँखें फेर लेने वाले की प्रवृति या तो राक्षसी होती है, या फिर, उसे स्त्री के सतीत्व की महत्ता का ज्ञान नहीं होता. दोनों दशाओं में मिल रही किसी ललकार को सीख मिलनी ही चाहिये. आपकी इस लघुकथा के भाव बहुत ही गहन और सटीक हैं.

लेकिन प्रस्तुतीकरण बहुत सुधार मांगती है. आपने कायदे से किसी डिलिमिनेटर, यानि फुलस्टॉप या कॉमा, का प्रयोग नहीं किया है. इस ओर भी ध्यान रखा करें.

शुभेच्छाएँ

Comment by Dr. Vijai Shanker on May 6, 2015 at 10:27pm
प्रयास पर बधाई, और प्रयास करें , शुभकामनाएं। सादर।

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