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सच का ओज......'जान' गोरखपुरी

२२२ /२२२ /२२

सच का ओज भरम क्या जाने
रौशनी मेरी तम क्या जाने
*
अँधियारे को झुकने वाले
इक दीये का दम क्या जाने
*
दुधिया रंग नहाने वाले
लालटेन का गम क्या जाने
*
मटई प्याल की सौंधी बातें                       मटई/मटिया (भोजपुरी)= मिट्टी
पालथीन के बम क्या जाने
*
हमको सिर्फ साकी से मतलब
और कोई मय हम क्या जाने
*
बात बात पे मुकरते हैं जो
क्या होती है कसम क्या जाने
*
क्या है ‘जान’ बशर का मजहब
गो ये दैरो हरम क्या जाने

***************************************
मौलिक व् अप्रकाशित (c) ‘जान’ गोरखपुरी
***************************************

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Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on June 2, 2015 at 8:58pm

आ० rajesh kumari जी हौसलाफजाई एवं शुभकामनाओ हेतु हार्दिक आभार!आ० प्रयास जारी है!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on June 2, 2015 at 8:56pm

भाई महर्षि जी प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 1, 2015 at 10:18pm

सुन्दर प्रयास है कृष्ण भैया ,जैसा की विद्वद्जनों ने कहा है ये ग़ज़ल और बेहतर हो सकती है बस कोशिश करते रहिये ,दिल से बधाई आपको एवं शुभकामनायें 

Comment by maharshi tripathi on June 1, 2015 at 10:05pm

अच्छी गजल हुई है आ. बड़े भाई जी ,,हार्दिक बधाई आपको |

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on June 1, 2015 at 9:45pm

बहुत बहुत शुक्रिया आ० सुनील शाहाबादी जी!प्रयासरत हूँ!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on June 1, 2015 at 9:41pm

आ० वीनस सर!गजल पर उपस्थिति व् मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार!

//हर जगह ११ को २ नहीं कर सकते//लय भंग दोष से कैसे बचा जाय कृपया इस बाबत भी मार्गदर्शन करें!

Comment by सुनील प्रसाद(शाहाबादी) on June 1, 2015 at 6:43pm
बहुत उम्दा भाई जान सुधार की भी संभावना है।
Comment by वीनस केसरी on May 31, 2015 at 12:21pm

अरकान को सही कर लें = २२ / २२/ २२ /२२

इस बहर की अवधारणा को और समझने की ज़रुरत है हर जगह ११ को २ नहीं कर सकते ...

कई शेर ले भंग दोष के शिकार हैं

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on May 29, 2015 at 2:40pm

आ० सौरभ सर रचना पर आपकी उपस्थिति से रचनाकर्म सार्थक हो जाता है,रचना को मात्रिक बहर में रखने का प्रयास किया है,जो त्रुटियाँ रह गयी है आगे उनका भी निवारण करने को कोशिश करता हूँ!सादर!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on May 29, 2015 at 2:35pm

हार्दिक आभार आ० आशुतोष सर!सुखनवाजी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!

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