For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मक्खन जैसा हाथ (लघुकथा )

मक्खन जैसा हाथ (लघुकथा )


नई -नवेली दुल्हन सी वो आज भी लगती थी । आँखों में उसके जैसे शहद भरा हो । पिता की गरीबी नें उसे उम्रदराज़ की पत्नी होने का अभिशाप दिया था ।


उसका रूप उसके ऊपर लगी समस्त बंदिशों का कारण बना । उम्रदराज और शक्की पति की पत्नी अपने जीवन में कई समझौते करने के कारण कुंठित मन जीती है ।


आज चूड़ी वाले ने फिर से आवाज लगाई तो उसका दिल धक्क से धडक गया । वो हमेशा की ही तरह पर्दे की ओट से धीरे से उसे पुकार बैठी , " ओ , चूड़ी वाले ! "


उसके मक्खन से हाथ को छुअन से होने वाले सिहरन का आभास देने वाले उस चूड़ी वाले का वो बडी़ शिद्दत से इंतजार किया करती थी ।


चुड़ीवाले ने हमेशा की तरह वहीं बाहर बैठ कर अपना साजों सामान पसार लिया । उसे मालूम था कि इस मक्खन जैसी हाथ वाली को सिर्फ हरे रंग की चूड़ियाँ ही अच्छी लगती है ।
पसारे हुए सभी चूडियों में धानी रंग की चूडियों पर पर्दे की ओट से मक्खन जैसी हाथ वाली की अंगुलियों ने इशारा किया ।

कुछ ही देर में मक्खन जैसे हाथ, चुड़ी वाले के खुरदरे से हाथ में देर तक बेचैनी और बेख्याली के पल को जीते रहे ।


कान्ता राॅय
भोपाल
मौलिक और अप्रकाशित

Views: 874

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by kanta roy on July 8, 2015 at 12:28am
बहुत बहुत आभार आपको आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी , इस कथा पर मै फिर से प्रयास करूंगी । सादर नमन

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 8, 2015 at 12:17am

आपने इसमें थोड़ा सुधार किया. लेकिन मेरा सादर आग्रह है कि इस प्रस्तुति को revamp किया जाय.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 7, 2015 at 11:42pm

आदरणीया कान्ताजी, चूँकि, कथा के विन्यास में सामान्य कथ्य न हो कर अत्यम्त क्लिष्ट परिस्थितियों का इंगित है, इसके प्रस्तुतीकरण के समय तनिक विशेष संयत तथा सचेत रहने की आवश्यकता थी. अन्यथा रचना-वाचन के बाद का प्रभाव न केवल तिरोहित हो जाता है बल्कि झुंझलाहट भी होती है. जिसकी चर्चा मैं कर चुका हूँ.
मेरा तो यही मानना है. .. सादर

Comment by kanta roy on July 7, 2015 at 11:28pm
उसके मक्खन से हाथों की (में ) छुअन से होने वाले सिहरन का आभास देने वाले उस चूड़ी वाले का ......आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी जरा सा टंकण त्रुटि के कारण यह स्थिति बन गई है । रचना पर आपकी उपस्थिति मेरा मनोबल बढा जाती है । मै इसे एडिट कर दूंगी । " मक्खन जैसी हाथ वाली " का मै सभी त्रुटि आपके मार्गदर्शन के तहत सुधार कर झुंझुलाहट वाली परिस्थितियों से कथा को उबारने की अति शीघ्र ही कोशिश करती हूँ । नमन आपको

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 7, 2015 at 11:13pm

आदरणीया कान्ताजी, बड़ा ही मनोवैज्ञानिक तथ्य साझा हुआ है. पक्ष को सही रखने का प्रयास भी हुआ है. हार्दिक बधाई देता हूँ. प्रस्तुति साहस के साथ साझा हुई है.

लेकिन कई वाक्य ’मक्खन वाले हाथ’ के कारण झुंझलाहट का कारण बन जाते हैं.
फिर इसे देखें -
उसके मक्खन से हाथों की छुअन से होने वाले सिहरन का आभास देने वाले उस चूड़ी वाले का ..
क्या हुआ इसका मतलब ?

शुभेच्छाएँ.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on June 28, 2015 at 3:49am

बढ़िया लघुकथा 

हार्दिक बधाई 

Comment by Hari Prakash Dubey on June 24, 2015 at 6:07pm

 बहुत  बढ़िया तराशी  हुई , एवम् स्त्री  के  एक मनोवेज्ञानिक पक्ष  का  सुन्दर चित्रण  करती इस रचना पर  बधाई  आ. कांता जी  ! सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 24, 2015 at 4:50pm

आदरणीया कांता जी , विषय और कथा दोनो बहुत सुन्दर लगे, आपको हार्दिक बधाई , लघु कथा के लिये ।

Comment by kanta roy on June 24, 2015 at 10:46am
आदरणीय विजय निकोरे जी हौसला वर्धन टिप्पणी के लिए तहे दिल से आपका आभार
Comment by kanta roy on June 24, 2015 at 10:45am
हृदय तल से आपको आभार आदरणीय वीर मेहता जी आपने कथा का मर्म बखूबी व्यक्त किया है अपने टिप्पणी में

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Monday
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service