For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कविता :- सलाम इस जीत के जज्बे को !

कविता :- सलाम इस जीत और जीत के जज्बे को !

कोई रंग नहीं होता खुशियों का

कोई ढंग नही होता उनका

कि हम आसानी से उन्हें कर सकें हासिल

जीत जज्बे से मिलती है

जीत,जीत के विश्वास से ही मिलती है

और एक जुटता से होती है फतह !

 

जीतते वो नहीं

जो ऊंचे पहाड़ों और ऊंची चढ़ाईयों से डरते है

सिर्फ बाते करते हैं

राजनीति और विडंबनाओं की

समंदर के भीतर और बाहर से आती

सुनामी हवाओं की

जिनके कदम बाहर निकलने से डरते है

जीतते वो हैं जो बेपरवाह होते है

आलोचनाओं से

जो जानते हैं हर विजय

सिल देती है आलोचकों का मुंह !!

 

सलाम जीत के इस जज्बे को

सलाम वर्षों बाद खत्म हुए  वनवास को

सलाम देश के जूनून को

सलाम इस एक जुट आवाज़ और प्रयास को

जिसने जता दिया

कि चमक और आकर्षक सफेदी ही नही जीतती

जीतती है इरादों की दृढ़ता और जीवटता !!!

 

जीतते हैं परंपरागत गांव और गंवई संकृति के ध्वज वाहक भी

क्योंकि उपनिवेशवादी शहर अब शिकार हो गये हैं भटकाव और अपसंस्कृति के

ईमानदारी देर और अंधेर नही देखती

नहीं देखती कि कौन करता है उसकी प्रशस्ति

या उड़ाता है कौन उसका उपहास

इसीलिए कहता हूँ जीतती है जीवटता

जीतता है विश्वास !!!!!

 

(@अभिनव अरुण -०३-०४-११)

 

Views: 5418

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Abhinav Arun on April 4, 2011 at 8:40am
आभार बागी भाई ! और ओ.बी.ओ. के सार्थक स्थापन और सफल सञ्चालन हेतु भी बधाई स्वीकारें !!! इस साईट की तरक्की से हमारी तरक्की जुडी है !

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 3, 2011 at 9:13pm
बेहतरीन काव्य कृत अरुण भाई, आपने बिलकुल दुरुस्त फरमाया है ............

जीतते वो हैं जो बेपरवाह होते है
आलोचनाओं से
जो जानते हैं हर विजय
सिल देती है आलोचकों का मुंह...

बेहद खुबसूरत और सार्थक रचना पर बधाई स्वीकार करे |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
51 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
8 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"मेरा प्रयास आपको अच्छा और प्रेरक लगा। हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और…"
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। "
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। "
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service