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"थकी हुयी सी जिन्दगी"

थकी हुयी सी जिन्दगी,
थका हुआ मुकाम है।
कौन सी जगह है ये,
हर कोई परेशान है।।
सुबह की धूप शाम है,
शाम रात सी घनी।
हवा मे क्या ये घुल रहा,
फिज़ा जहर सी बनी।
कहाँ आ गये है हम,
हर कोई हैरान है।।
अजनबी है हर कोई,
अजनबी है ये जहाँ।
मोबाईल वैब से जुडे,
दिलो के फासले यहाँ।
हर किसी का नाम है,
पर हर कोई बेनाम है।।
थकी हुयी सी जिन्दगी,
थका हुआ मुकाम है।
कौन सी जगह है ये,
हर कोई परेशान है।।

'विरेन्दर वीर मेहता' (मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by VIRENDER VEER MEHTA on June 28, 2015 at 4:05pm
एदरणो
Comment by विनय कुमार on June 28, 2015 at 3:05pm

// कहाँ आ गये है हम,
हर कोई हैरान है // , वाह , बहुत सुन्दर अल्फ़ाज़ , बेहतरीन पंक्तियाँ आदरणीय वीर मेहता जी , बधाई क़ुबूलें.

Comment by kanta roy on June 28, 2015 at 2:59pm
अजनबी है हर कोई,
अजनबी है ये जहाँ।
मोबाईल वैब से जुडे,
दिलो के फासले यहाँ।
हर किसी का नाम है,
पर हर कोई बेनाम है।।....... लफ़्ज आपके जैसे बात मेरी कह गये .... वाह !!! आदरणीय वीर मेहता जी ये भी आप कमाल करते है । बहुत खूब

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