For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रात के दूसरे पहर बड़े जेठ को साल भर पहले ही विधवा हुयी मंझली जिठानी के कमरे से निकलते देख नवविवाहित छोटी बहू सकते में आ गयी। पति के गोलमोल जवाबो से संतुष्टी नही हुयी तो अगली सुबह ही मौका देख बड़ी जिठानी के कमरे में जा पहूँची।
"जीजी! एक बात कहूं।" दबी जुबान में सारा मामला सामने रखती हुयी पूछने लगी। "मंझली जीजी के हालात की 'मजबूरी' तो मन्ने कुछ समझ भी आवे से पल इस अनर्थ को देख आप भी चुप रही, वो काहे?"
"छोटी बहू। कभी कभी शौर मचावन से ज्यादा चुप रहना जरूरी होवे से।" बड़ी जिठानी ने आॅखें झुकाये कहना शुरू किया। "बरसो से वारिस का इंतजार करती हवेली को 'उसकी' गोद से मेरे नाम का वारिस मिल जावे तो इसमें कोई हर्ज भी ना से।" बड़ी जिठानी अपनी बात पूरी कर चुप हो गयी और नयी बहू इस मूक समझौते के सही गलत का हिसाब लगाने लगी।
'विरेन्दर वीर मेहता' (मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 650

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 8, 2015 at 12:12am

इस् लघुकथा पर जो प्रश्न आये वे सटीक और प्रासंगिक हैं. अभी एक लघुकथा पर जो कहा वह पुनः यहाँ भी कहूँगा, कि, अनावश्यक लघुकथाओं को एडल्ट न किया जाय.
इस संदर्भ में आदरणीया कान्तारायजी की लघुकथा के कथ्य की बात करूँगा. हालाँकि उस लघुकथा ’मक्खन वाले हाथ’ का प्रस्तुतीकरण अनगढ़ था लेकिन मनोवैज्ञानिक विन्दुओं को सहजता से उठाने का प्रयास हुआ है.
हमारे पास अभी बहुत से विन्दु और इंगित हैं जिनको शीर्षक बना कर लघुकथाएँ हो सकती हैं. समर्थवान केलिए कोई शीर्षक सहज होता है. हम समर्थवान होने का सतत अभ्यास करें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on June 28, 2015 at 4:03am

समाज में व्याप्त विसंगतियों को अभिव्यक्त करती प्रभावकारी और सफल लघुकथा 

हार्दिक बधाई आदरणीय वीरेंदर जी 

प्रश्न बहुत सारे उठाये गए पर ये भी इसी समाज की एक सच्चाई है 

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on June 26, 2015 at 6:18pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारयण श्रीवास्तव जी  / ओम प्रकाश क्षत्रिय जी  / हरी प्रकाश दुबे जी / मनोज कुमार अहसास जी  और अर्चना त्रिपाठी जी ..... आप सभी गुनीजनो का कथा को गंभीरता से अवलोकन करने और बहुमूल्य प्रतिक्रिया देने का दिल से आभारी हूँ .

आप लोगो ने कुछ प्रशन भी किये है जो कुछ हद तक सही भी है और स्वाभिक भी है ... इनके प्रति उत्तर मैं आप लोगो से कुछ बाते जरूर शेयर  करना चाहूँगा ....

{  ये कथा एक ऐसे घर की है जिसमे बड़े भाई के कोई पुत्र नहीं है जो हवेली के वारिस  होने की पहली शर्त है , मंझला भाई दुर्गाटन का शिकार हो जाता  जो की निसंतान ही था ....  उसी की पत्नी का  घर में बड़े जेठ ने शोषण की शुरुआत की . ... पत्नी और पत्नी दोनों ने मिलकर इस अनर्थ के लिए मंजली जिठानी पर दबाब बनाया की, तुमाहरी गोद से मिली संतान हमारे नाम से हवेली की वारिस बनेगी और इसके साथ ही तुम्हारी "सभी" जरूरते पूरी होती रहेगी. और इसी में हमारे परिवार का मान समान भी बना रहेगा ... ...

और ये सब इसलिए किया गया क्यूंकि सबसे छोटे भाई के संतान या लड़का होने के बाद वही हवेली का वारिस न बन जाए .}

..... सम्भव है ये सब बाते कथा में सपष्ट न  हो सकी हो जिसके लिए शायद  मेरी रचना का लेखन कार्य ही दोषी है और इसके लिए मुझे खेद भी है.

और अंत में एक बात भाई मनोज कुमार जी से ......  आपने ये सही कहा की हमें ऐसी कथा लिखनी चाहिए जो समाज को प्रेरणा दे सके.... लेकिन इस समाज में बहुत सी बाते ऐसी भी होती है जिन्हें समाज तक पहुचाने का कार्य भी हम जैसे लोगो को ही करना चाहिय..... फिर भी अगर इस कथा से किसी को भावनाओं को ठेस पहुँची हो तो मैं क्षमा चाहूँगा ....

Comment by Archana Tripathi on June 25, 2015 at 2:11am
क्या जो वारिस होगा वह जायज कहलायेगा ? नैतिकता का सवाल नहीं उठेगा ?
क्षमा करियेगा मित्र सवाल उठ रहे थे जो आपके समक्ष रख दिए ।
Comment by Hari Prakash Dubey on June 24, 2015 at 5:29pm

आदरणीय  वीर  भाईसाहब  सुन्दर  रचना है  , पर कुछ  प्रश्न जायज लगतें है  , अगर मान  भी  लें  की  सबको  लडकियां ही  थी ! ऐसा हो  सकता है साल भर  की  जगह कुछ महीने  पहले  कर दिया  जाय   ! सादर 

Comment by मनोज अहसास on June 24, 2015 at 4:43pm
पुनः निवेदन
विधवा भी साल भर पहले की है
तो कैसे उसकी संतान वारिस बनेगी
सादर
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 24, 2015 at 4:36pm

वीर जी

इसमें एक बात समझ में नहीं आयी . माना वारिस मिलजाएगा पर बिधवा से -------?

Comment by मनोज अहसास on June 24, 2015 at 4:22pm
नमस्कार सर
प्रणाम
मुझे बहुत विनम्रता पुर्वक निवेदन करना है
कि इस तरह की कथाये क्या उद्देश्य रखती है
क्या विधवा स्त्री की संतान वारिस बन सकती है ऎसे समाज में जिसका कथा में वर्णन है तथा तीसरी बहु भी है तो वारिस देने के लिए
और इन कथाओ से समाज किस तरह की प्रेरणा प्राप्त करे
पढ़ कर रहा नहीं गया इस लिए लिख दिया
आशा है आप क्षमा कर देगे
और सकरात्मक उत्तर देगे
सादर
Comment by Omprakash Kshatriya on June 24, 2015 at 8:58am

वारिस चाहिए. जैसे  भी मिले. अच्छी लघुकथा  आदरणीय VIRENDER VEER MEHTA जी .

बधाई इस लघुकथा के लिए  आप को .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service